कबीरपुर : नाथनगर स्थित श्री चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र में आयोजित दशलक्षण महापर्व के पहले दिन रविवार को उत्तम क्षमा धर्म की उपासना पूरी आस्था, निष्ठा एवं भक्ति भाव से की गयी. सिद्धक्षेत्र में जबलपुर के पंडित जागेश शास्त्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि लगातार प्रयास से कोई भी कार्य सरल हो जाता है. व्यक्ति असफलता से नहीं निराशा से हारता है. मैत्री और शांति का पर्व है दशलक्षण महापर्व. जहां क्रोध है, वहां दुख है. जहां शांति है, वहां समस्त प्राणी जगत में मैत्री का भाव जागृत हो जाता है. गुरु का साथ जीवन को सुनहरा बना देता है. विनम्रता किसी के भी व्यक्तित्व में चार चांद लगा देती है. आत्म प्रक्षालन तथा पाप विमोचन का परम अवसर है दशलक्षण महापर्व. सद्गुगणों से भरे यह दशलक्षण को अपना कर व्यक्ति मुक्तिपथ का मार्ग प्रशस्त कर सकता है. इससे पहले भगवान वासुपूज्य प्रतिमा पर आगरा के रवींद्र सैनी ने स्वर्ण कलश से अभिषेक तथा ग्वालियर के रजत कलश से लक्ष्मण प्रसाद ने अभिषेक किया.
विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालुओं ने निभायी भागीदारीइस समारोह में कई राज्यों से पधारे भक्तजनों एवं श्रद्धालुओं ने महत्वपूर्ण भागीदारी निभायी. भक्तजनों ने 24 तीर्थंकरों की वेदियों एवं मान स्तंभ की परिक्रमा की. समारोह में कई राज्यों राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र,उत्तरप्रदेश आदि के श्रद्धालु शामिल हुए और पूजा-अर्चना की. वहीं दूसरी ओर कोतवाली चौक स्थित जैन मंदिर में भी दशलक्षण महापर्व धूमधाम से हुआ. उत्तम क्षमा धर्म का सामूहिक पूजन एवं मंत्र पाठ किया गया. इस मौके पर विजय रारा, पदम पाटनी, जयकुमार काला, अशोक पाटनी, शांति बड़जात्या, पवन गंगवाल, उत्तम पाटनी, सुमंत पाटनी, संजय विनायका, राम जैन आदि उपस्थित थे.
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