बांध टूटे, स्कूल डूबे, NH पर भी चढ़ा पानी, बिहार में कोसी और गंगा के रौद्र रूप से सहमे लोग

कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार के जिलों में गंगा और कोसी उफान पर होने के कारण बाढ़ का पानी अब शहरों में घुसने लगा है. जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है.

Bihar Flood: कोसी और गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण कोसी-सीमांचल और पूर्वी बिहार में बाढ़ ने रौद्र रूप धारण कर लिया है. कहीं बांध टूट गये हैं, तो कहीं स्कूलों व सरकारी कार्यालयों में पानी घुस गया है. गांवों की सड़कें ही नहीं, एनएच भी बाढ़ की चपेट में आ गया है. सुपौल में कोसी नदी का जलस्तर अप स्ट्रीम में 02 लाख 23 हजार 755 क्यूसेक बढ़ते क्रम में दर्ज किया गया. नदी के 31 फाटकों को भी खोल दिया गया. 

खगड़िया में टूटा बांध

खगड़िया के गोगरी प्रखंड की बौरना पंचायत का जमींदारी बांध मंगलवार की सुबह टूट गया. बांध टूट जाने से बांध के अंदर घिरे 300 घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया. सभी घर पूरी तरह से डूब गया. बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाने से लोग किसी तरह अपनी जान बचाते हुए ऊंचे स्थान पर शरण ले रहे हैं. जमींदारी बांध की वजह से पंचायत के कई लोग बाढ़ से सुरक्षित थे. लेकिन अचानक बांध टूट जाने से वे सभी लोग भी बाढ़ की चपेट में आ गये हैं.

परबत्ता प्रखंड में की कबेला पंचायत के वार्ड संख्या 1 व 2 जागृति टोला डुमरिया खुर्द में नवनिर्मित सड़क में दरार आ गयी. सड़क में दरार आने के कारण गोगरी-नारायणपुर बांध पर आवागमन पांच घंटे तक ठप हो गया. 

मुंगेर में डूबे स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र

मुंगेर जिले में बाढ़ के पानी का फैलाव नये-नये क्षेत्रों में होने लगा है. एक ओर जहां मुंगेर सदर व बरियारपुर प्रखंड के कई विद्यालयों व स्वास्थ्य केंद्रों में बाढ़ का पानी घुस गया है, वहीं दूसरी ओर दो दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क भंग हो गया है. जाफनगर पंचायत के मध्य विद्यालय, कुतलुपुर पंचायत के मध्य विद्यालय बाबू राम सिंह टोला में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है.

बरियारपुर प्रखंड के मध्य विद्यालय दीवानी टोला व मध्य विद्यालय फुलकिया ब्रह्मस्थान के परिसर में भी घुस आया है. इसके कारण इन विद्यालयों में पढ़ाई के साथ ही सभी प्रकार के कामकाज ठप हो गये हैं. हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर कुतलुपुर में बाढ़ का पानी घुस गया है.  बरियारपुर थाना क्षेत्र के रहिया गांव, हरिजन कल्याण टोला, मुरला मुसहरी समेत कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से भंग हो गया है. असरगंज प्रखंड की दो पंचायतों अमैया व चोरगांव में बाढ़ ने दस्तक दे दी है. 

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भागलपुर में गंगा दिखा रही रौद्र रूप

भागलपुर में गंगा ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. इस्माईलपुर अंचल कार्यालय बाढ़ में घिर गया है. बाढ़ का पानी नाथनरगर के गांव के साथ ही शहरी क्षेत्र बंगालीटोला व चंपानगर तरफ भी पानी बढ़ रहा है. कहलगांव के आमापुर, कुलकुलिया, पकड़तल्ला समेत दर्जनों गांवों के सैकड़ों घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है. सबौर में 100 घरों में पानी प्रवेश कर गया है.

एनएच 80 पर बाढ़ आफत बनकर टूटा है. खानकित्ता से धोषपुर के बीच पुल निर्माण स्थल के पास पानी का बहाव तेज हो गया है. कई वाहन इसमें नलटे. जगह-जगह पथ पर दरार पड़ चुकी है. बाढ का पानी इंजीनियरिंग कॉलेज छात्रावास से लेकर जियाउद्दीनपुर चौका बाबुपुर रजंदीपुर संतनगर इंग्लिश मसाढु ममलखा पंचायत सहित शंकरपुर व बैजलपुर पंचायत तक फैल चुका है. 

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लेखक के बारे में

By Anand Shekhar

Dedicated digital media journalist with more than 2 years of experience in Bihar. Started journey of journalism from Prabhat Khabar and currently working as Content Writer.

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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