भागलपुर : वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों की समय पर पहचान और इलाज के लिए भागलपुर जिले के अस्पतालों में चेस्ट क्लिनिक स्थापित किये जाएंगे. जिला स्वास्थ्य समिति ने राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश के आधार पर संबंधित अस्पतालों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.
चेस्ट क्लिनिक में मरीजों की स्क्रीनिंग के साथ बीमारी के संभावित कारणों की पहचान, जरूरी जांच और मानक के अनुसार उपचार की व्यवस्था की जाएगी. मरीजों को प्रदूषण से बचाव और स्वस्थ जीवनशैली के उपायों के प्रति भी जागरूक किया जाएगा.
अधिक जोखिम वाले मरीजों का बनेगा रजिस्टर
अधिक जोखिम वाले मरीजों को चिह्नित कर उनका अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा. ऐसे मरीजों को एएएम, पीएचसी और सीएचसी से जोड़कर नियमित फॉलोअप कराया जाएगा. मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल स्तर पर अधीक्षक को नोडल पदाधिकारी बनाया जाएगा.
चेस्ट क्लिनिक को टीबी एवं चेस्ट डिजीज/पल्मोनोलॉजी विभाग से जोड़ा जाएगा, ताकि मरीजों को आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं उपलब्ध हो सकें.
सर्दियों में बढ़ेगा निगरानी का फोकस
सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण का प्रभाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए अक्टूबर से फरवरी तक चेस्ट क्लिनिक की दैनिक रिपोर्टिंग की जाएगी. मरीजों की जांच, उपचार और फॉलोअप से संबंधित रिकॉर्ड निर्धारित प्रारूप में रखा जाएगा.
इसके अलावा चेस्ट क्लिनिक का एनसीडी क्लिनिक, टीबी यूनिट और टोबैको सेसेशन क्लिनिक के साथ समन्वय कर संचालन किया जाएगा. इससे वायु प्रदूषण और धूम्रपान से जुड़े श्वसन रोगों की पहचान और उपचार को एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों की समय पर होगी पहचान
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का उद्देश्य प्रदूषण के कारण होने वाली श्वसन संबंधी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान करना और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है. खासकर अधिक जोखिम वाले मरीजों की नियमित निगरानी से गंभीर स्थिति बनने से पहले हस्तक्षेप किया जा सकेगा.
