मुख्य बातें:
भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट
Bypass Rail Line Project: भागलपुर-बांका रेलखंड पर स्थित गोनूधाम हॉल्ट के दिन बहुरने वाले हैं. इसे एक पूर्ण स्टेशन के रूप में विकसित करने की प्रशासनिक कवायद बेहद तेज हो गई है. रेलवे की ओर से स्टेशन निर्माण के लिए ट्रैक के दोनों तरफ मिट्टी भराई का काम शुरू कर दिया गया है. भागलपुर रेल मंडल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में इस हॉल्ट पर केवल एक ही रेल लाइन उपलब्ध है, लेकिन स्टेशन का दर्जा मिलने के बाद यहाँ दो शानदार प्लेटफॉर्म बनाए जाएंगे.
गोड्डा सांसद की पहल पर रेल मंत्री ने दी थी योजना को स्वीकृति
- सांसद का प्रयास: इस रेल बाईपास लाइन के निर्माण को लेकर गोड्डा के भाजपा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे लगातार रेल मंत्रालय से संपर्क में थे. स्वयं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्र लिखकर सांसद को सूचित किया था कि पूर्व रेलवे (ER) के अंतर्गत इस बाईपास लाइन को मंजूरी दे दी गई है.
- परियोजना की लंबाई और लागत: मालदा रेल मंडल के तहत आने वाली यह नई भागलपुर बाईपास रेल लाइन कुल 13.38 किलोमीटर लंबी होगी. इस रणनीतिक प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹303.02 करोड़ निर्धारित की गई है.
इस नई लाइन के बन जाने से भागलपुर जंक्शन पर वर्तमान में रहने वाला ट्रेनों और मालगाड़ियों का अत्यधिक दबाव काफी कम हो जाएगा. साथ ही, ट्रेनों का परिचालन अधिक सुचारू और समयबद्ध तरीके से हो सकेगा. पूर्व में ही इस रूट का सर्वे पूरा कर लिया गया था और आने वाले समय में इस ट्रैक का सीधा जुड़ाव कटरिया रेल लाइन से भी हो जाएगा, जिससे लंबी दूरी की ट्रेनों को घूमकर नहीं जाना पड़ेगा.
Bypass Rail Line Project: सबौर और गोनूधाम बनेंगे जंक्शन; 2028 तक पूरा होगा काम
गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने बताया कि इस बाईपास योजना के लिए वे लंबे समय से प्रयासरत थे. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सबौर रेलवे स्टेशन के विकास के साथ-साथ अब प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गोनूधाम का भी कायाकल्प होगा. इसी साल इस योजना पर काम शुरू कर दिया गया है और साल 2028 तक इसे हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा. सबौर और गोनूधाम को जंक्शन बनाने का काम शुरू हो चुका है और यह भागलपुर के बाद जिले का सबसे बड़ा रेल हब बनेगा.
इस नई बाईपास रेल लाइन के चालू होने से बांका, गोड्डा, भागलपुर और नवगछिया की तरफ आने-जाने वाले यात्रियों के समय में भारी बचत होगी और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों का सीधा जुड़ाव मुख्य रेल नेटवर्क से हो जाएगा.
–
