Bihar Supply Officers Protest: कहलगांव. सरकारी राशन व्यवस्था संभालने वाले आपूर्ति अधिकारी गुरुवार को काला बिल्ला लगाकर दफ्तर पहुंचे. बिहार आपूर्ति सेवा संघ के आह्वान पर अधिकारियों ने लंबित 10 सूत्री मांगों के समर्थन में यह सांकेतिक विरोध शुरू किया है. आंदोलन 20 से 26 अगस्त तक चलेगा.
काला बिल्ला लगाकर काम करने का फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब आपूर्ति विभाग पर राशन वितरण, जांच और राशन कार्ड से जुड़े कामों की बड़ी जिम्मेदारी है. अधिकारियों का कहना है कि विरोध के बावजूद आम लोगों से जुड़े जरूरी काम प्रभावित नहीं होंगे और सभी प्रखंडों में राशन वितरण सहित विभागीय कार्य सामान्य रूप से जारी रहेंगे.
लेकिन 26 अगस्त तक सरकार की ओर से मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला सिर्फ काला बिल्ला लगाने तक सीमित नहीं रहने वाला है. संघ ने चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है.
दफ्तर पहुंचे अधिकारी, बांह पर दिखा काला बिल्ला
गुरुवार से कहलगांव अनुमंडल क्षेत्र में आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने काला बिल्ला लगाकर अपने नियमित काम किये. सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी मनीष कुमार और पीरपैंती प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी खुशबू कुमारी सहित अन्य अधिकारियों ने विरोध में हिस्सा लिया.
अधिकारियों ने साफ किया कि यह सांकेतिक विरोध है. वे अपने कार्यालयीन दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे, ताकि राशन वितरण और आम उपभोक्ताओं से जुड़े काम बाधित न हों.
इस विरोध के जरिए अधिकारी सरकार का ध्यान उन मांगों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, जिन्हें संघ के अनुसार लंबे समय से उठाया जा रहा है.
वर्षों से लंबित हैं वाहन और कंप्यूटर जैसी मांगें
सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि वाहन, कंप्यूटर, पदोन्नति और कर्मियों की बहाली जैसी बुनियादी मांगें वर्षों से लंबित हैं.
आपूर्ति अधिकारियों का काम केवल कार्यालय में बैठकर कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है. राशन दुकानों की जांच, वितरण व्यवस्था की निगरानी और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यों के लिए उन्हें लगातार क्षेत्र में जाना पड़ता है.
ऐसे में अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक प्रखंड को जांच के लिए सरकारी वाहन या वाहन किराये के लिए राशि मिलना जरूरी है. संसाधनों की कमी का असर विभागीय कामकाज की गति पर भी पड़ सकता है.
200 रिक्त पदों पर प्रोन्नति की मांग
संघ की प्रमुख मांगों में करीब 200 रिक्त पदों पर प्रोन्नति भी शामिल है.
अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से पदोन्नति की प्रक्रिया लंबित रहने से संवर्ग में असंतोष है. इसके अलावा संवर्ग पुनर्गठन कर डाटा एंट्री कर्मियों की बहाली की मांग भी की जा रही है.
डिजिटल दौर में आपूर्ति विभाग के काम का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर और ऑनलाइन व्यवस्था से जुड़ा है. ऐसे में कंप्यूटर, प्रिंटर और लैपटॉप जैसे उपकरणों की उपलब्धता को अधिकारी अपने काम के लिए जरूरी मान रहे हैं.
'आपूर्ति निरीक्षक' के पदनाम को बदलने की मांग
संघ की मांगों में 'आपूर्ति निरीक्षक' पदनाम को बदलकर 'प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी' करने की मांग भी शामिल है.
इसके अलावा अतिरिक्त कार्य करने पर भत्ता और क्षतिपूर्ति अवकाश देने की मांग की गयी है. अधिकारियों का कहना है कि अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिलने की स्थिति में उसके अनुरूप सुविधा और क्षतिपूर्ति का प्रावधान होना चाहिए.
राशन कार्ड अभियान के लिए भी अतिरिक्त संसाधन चाहिए
सरकार की ओर से समय-समय पर राशन कार्ड से जुड़े अभियान चलाये जाते हैं. इन अभियानों में बड़ी संख्या में लोगों के आवेदन, दस्तावेजों की जांच और संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है.
संघ की मांग है कि राशन कार्ड अभियान के लिए अतिरिक्त कर्मियों और जरूरी उपकरणों की व्यवस्था की जाये.
अधिकारियों का तर्क है कि पर्याप्त मानव संसाधन और तकनीकी सुविधाएं मिलने से लोगों के आवेदन और शिकायतों का निपटारा अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा.
सरकार से कई बार हुई वार्ता, नहीं निकला ठोस समाधान
मनीष कुमार के अनुसार इन मांगों को लेकर सरकार के साथ कई बार वार्ता हो चुकी है. लेकिन संघ का कहना है कि अब तक ऐसा ठोस निर्णय नहीं हुआ है, जिससे लंबित मांगों का समाधान हो सके.
इसी वजह से अधिकारियों ने पहले चरण में सांकेतिक विरोध का रास्ता चुना है. 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर काम करने के बाद भी अगर मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो संघ ने आगे चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है.
राशन वितरण पर नहीं पड़ेगा असर
आपूर्ति अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि विरोध के दौरान आम लोगों को परेशान नहीं होने दिया जायेगा.
उनके अनुसार सभी प्रखंडों में राशन वितरण, जांच और अन्य जरूरी विभागीय कार्य सामान्य रूप से जारी हैं. यानी काला बिल्ला लगाकर विरोध करने के बावजूद अधिकारियों ने अपने नियमित काम को जारी रखा है.
यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आपूर्ति विभाग सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है. राशन वितरण में किसी तरह की बाधा का सीधा असर लाभुक परिवारों पर पड़ सकता है.
26 अगस्त के बाद क्या होगा?
फिलहाल अधिकारियों का सांकेतिक विरोध 26 अगस्त तक चलेगा. अब निगाह सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है.
यदि इस अवधि में मांगों को लेकर सकारात्मक पहल होती है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अगर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो संघ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने को मजबूर होगा.
इससे आने वाले दिनों में आपूर्ति विभाग के कामकाज पर दबाव बढ़ सकता है. फिलहाल अधिकारियों ने यह जरूर सुनिश्चित किया है कि उनके विरोध का असर राशन वितरण और आम उपभोक्ताओं से जुड़े जरूरी कामों पर न पड़े.
Bihar Supply Officers Protest: आपूर्ति अधिकारियों की 10 सूत्री मांगें
संघ की प्रमुख मांगों में प्रत्येक प्रखंड में जांच के लिए सरकारी वाहन या भाड़े की सुविधा, कार्यालय में कंप्यूटर, प्रिंटर और लैपटॉप उपलब्ध कराना, 200 रिक्त पदों पर प्रोन्नति, संवर्ग पुनर्गठन के साथ डाटा एंट्री कर्मियों की बहाली और 'आपूर्ति निरीक्षक' पद का नाम बदलकर 'प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी' करना शामिल है.
इसके अलावा अतिरिक्त कार्य के लिए भत्ता और क्षतिपूर्ति अवकाश देने तथा राशन कार्ड अभियान के लिए अतिरिक्त कर्मियों और उपकरणों की व्यवस्था करने की मांग भी है.
अब देखना यह है कि 26 अगस्त तक सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या काला बिल्ला लगाकर शुरू हुआ यह विरोध यहीं समाप्त होता है या आगे बड़े आंदोलन का रूप लेता है.
