राघोपुर में बाढ़ से घर छोड़ने की मजबूरी, राहत शिविर में बच्चों की पढ़ाई से लेकर योग तक की होगी व्यवस्था

राघोपुर में गंगा के बढ़ते जलस्तर से आई बाढ़ के कारण लोग राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं. इन शिविरों में अब सिर्फ आश्रय नहीं, बल्कि भोजन, स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष पोषण जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी.

Raghopur Flood Relief Camp: भागलपुर. गंगा का रौद्र रूप राघोपुर पंचायत के लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है. जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि और तटीय कटाव के कारण कई वार्डों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है. घरों में पानी पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सुरक्षित ठिकाने की ओर जाने को मजबूर हैं. ऐसे हालात में जिला प्रशासन ने राहत शिविरों को सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए जरूरी सुविधाओं से लैस करने की तैयारी की है.

जिलाधिकारी के निर्देश पर नवगछिया के इस्माइलपुर अंचल स्थित गणेश बासा और साहू ईंटभट्ठा, जाह्नवी चौक में राहत शिविर संचालित करने का निर्देश दिया गया है. यहां बाढ़ पीड़ितों को भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, स्वच्छ पानी और पशुओं के लिए चारे जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है. प्रशासन ने अलग-अलग विभागों को इसकी जिम्मेदारी भी सौंप दी है.

घरबार छोड़कर राहत शिविर की ओर बढ़ रहे लोग

गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी और तटीय कटाव ने राघोपुर पंचायत के कई हिस्सों में स्थिति गंभीर कर दी है. बाढ़ का पानी वार्डों में प्रवेश करने के बाद लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार को सुरक्षित रखना है. घर छोड़कर राहत शिविर पहुंचने वाले लोगों के लिए जिला प्रशासन ने पहले से व्यवस्थाएं तय करने पर जोर दिया है.

राहत शिविरों में भीड़, भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी के तहत विभागों की जिम्मेदारी निर्धारित की गयी है. कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल की तैनाती भी की जायेगी.

सुबह और शाम मिलेगा पौष्टिक भोजन

राहत शिविर में रहने वाले लोगों के भोजन की जिम्मेदारी जीविका के डीपीएम की देखरेख में होगी. सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे और शाम सात बजे से रात नौ बजे के बीच भोजन का वितरण किया जायेगा.

बाढ़ की स्थिति में शिविर में बड़ी संख्या में लोगों के रहने के कारण भोजन की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होगी. इसे ध्यान में रखते हुए सिविल सर्जन और खाद्य सुरक्षा अधिकारी को खाने की गुणवत्ता की जांच की जिम्मेदारी दी गयी है.

बच्चों की पढ़ाई नहीं होगी बंद, चलेगा अस्थायी स्कूल

बाढ़ के कारण प्रभावित इलाकों के स्कूल बंद होने की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े, इसके लिए राहत शिविर में अस्थायी विद्यालय चलाये जायेंगे. प्रभावित क्षेत्रों के बंद पड़े स्कूलों के शिक्षकों को शिविर में तैनात किया जायेगा.

बच्चों को पढ़ाई के लिए किताबें और जरूरी सामग्री भी उपलब्ध करायी जायेगी. इतना ही नहीं, शारीरिक शिक्षकों की ओर से योग शिविर का भी आयोजन किया जायेगा. यानी राहत शिविर में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी नियमित गतिविधियों को भी जारी रखने की कोशिश होगी.

गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों पर विशेष नजर

राहत शिविर में छह वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी अलग से व्यवस्था की गयी है. इस्माइलपुर और खरीक की सीडीपीओ को शिविर में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने की जिम्मेदारी दी गयी है.

आंगनबाड़ी केंद्र के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को दूध और पोषण सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी. साथ ही उनकी चिकित्सा जांच की सुविधा भी रहेगी. बाढ़ जैसी आपदा में छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त पोषण और स्वास्थ्य देखभाल की जरूरत को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी.

24 घंटे स्वास्थ्य सेवा, सांप-बिच्छू से भी सुरक्षा

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी के साथ विषैले जीवों का खतरा भी बढ़ जाता है. इसे देखते हुए स्वास्थ्य शिविर में तीन पालियों में डॉक्टरों की तैनाती की जायेगी, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को उपचार मिल सके.

वहीं वन विभाग की टीम को सांप और बिच्छू जैसे विषैले जीवों से सुरक्षा और रेस्क्यू के लिए चौबीसों घंटे तैनात किया गया है. इससे राहत शिविर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को आपात स्थिति में मदद मिल सकेगी.

साफ पानी, बिजली और मवेशियों के चारे का भी इंतजाम

राहत शिविर में सिर्फ लोगों के रहने और खाने की व्यवस्था ही नहीं होगी. स्वच्छता को लेकर ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव और कचरा प्रबंधन कराया जायेगा. लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बोरिंग और चापाकल की व्यवस्था भी रहेगी.

बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के सामने मवेशियों को बचाये रखने की भी चुनौती रहती है. इसे देखते हुए पशुपालन विभाग को नियमित चारा उपलब्ध कराने और मवेशियों की चिकित्सकीय देखभाल की जिम्मेदारी दी गयी है.

Raghopur Flood Relief Camp: रोजाना होगा शिविर का भौतिक सत्यापन

राहत शिविरों में व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए प्रशासन ने निगरानी की व्यवस्था भी तय की है. संबंधित प्रशासनिक अधिकारी प्रतिदिन शिविर का कम से कम 10 प्रतिशत भौतिक सत्यापन करेंगे और इसकी रिपोर्ट जिला आपदा शाखा को भेजेंगे.

इसका उद्देश्य यह देखना है कि बाढ़ पीड़ितों को तय व्यवस्था के अनुसार भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, स्वच्छता और दूसरी जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं. गंगा के जलस्तर और कटाव की स्थिति को देखते हुए राहत शिविरों में व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी आगे भी महत्वपूर्ण रहेगी.

फिलहाल राघोपुर में बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना और राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता है. घर से दूर शिविर में पहुंचने वाले लोगों के लिए यह व्यवस्था सिर्फ तत्काल राहत नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार के रोजमर्रा के जीवन को संभालने की कोशिश भी है.

Also Read: “बाप रे! सब कुछ बह गया…”, नेपाल बाढ़ त्रासदी से भटककर मुजफ्फरपुर पहुंची डरी-सहमी महिला

Also Read: बिहार में बढ़ रहा बाढ़ का खतरा, गंगा-गंडक के बाद सोन भी उफनाई, 56 गेट खुले, कई इलाकों में तबाही

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By संजीव कुमार झा

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >