खाद के लिए अब दुकान-दुकान भटकने की जरूरत नहीं! मोबाइल से होगी बुकिंग, जानें बिहार में लागू हुई नयी डिजिटल व्यवस्था

बिहार के किसानों को अब खाद के लिए दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. राज्य में उर्वरक खरीद की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है. किसान अब मोबाइल ऐप से खाद की अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे और इसकी उपलब्धता की जानकारी पहले ही प्राप्त कर सकेंगे. यह नई व्यवस्था पारदर्शिता लाएगी और कालाबाजारी पर रोक लगाएगी.

Fertilizer Online Booking Bihar: खाद लेने के लिए किसानों को अब पहले यह पता करने की जरूरत नहीं होगी कि किस दुकान पर उर्वरक उपलब्ध है और कहां स्टॉक खत्म हो चुका है. बिहार में उर्वरक खरीद की प्रक्रिया अब डिजिटल होने जा रही है. किसान अपने मोबाइल से खाद की अग्रिम बुकिंग कर सकेंगे और पहले ही जान सकेंगे कि खाद कहां और कितनी मात्रा में उपलब्ध है.

उर्वरक वितरण की यह नयी डिजिटल व्यवस्था एक सितंबर से बिहार में प्रभावी हो गयी है. भारत सरकार के उर्वरक विभाग और कृषि व किसान कल्याण विभाग के संयुक्त प्रयास से विकसित फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल यानी एफएसएएस मोबाइल एप के जरिये यह व्यवस्था लागू की गयी है.

इसका मकसद सिर्फ ऑनलाइन बुकिंग शुरू करना नहीं है. उर्वरक की बिक्री में पारदर्शिता लाने, कालाबाजारी पर रोक लगाने और किसानों को खाद के लिए दुकानों के चक्कर लगाने से राहत दिलाने के लिए पूरी व्यवस्था को डिजिटल किया गया है.

मोबाइल में पता चलेगा कहां उपलब्ध है खाद

नयी व्यवस्था में किसान गूगल प्ले स्टोर से एफएसएएस एप डाउनलोड कर सकते हैं. इसके बाद मोबाइल के जरिये उर्वरक की अग्रिम बुकिंग की जा सकेगी.

इस सुविधा से किसानों को खाद खरीदने से पहले ही इसकी उपलब्धता के बारे में जानकारी मिल सकेगी. यानी किसान यह जान सकेंगे कि खाद किस स्थान पर उपलब्ध है और वहां कितनी मात्रा मौजूद है.

खाद की कमी के समय किसानों के लिए यह सुविधा खास मायने रख सकती है. अभी कई बार किसान खाद की तलाश में अलग-अलग दुकानों तक पहुंचते हैं. नयी व्यवस्था का उद्देश्य इसी परेशानी को कम करना है.

जमीन पूर्वजों के नाम है तो भी मिलेगा फायदा

डिजिटल व्यवस्था में उन किसानों के लिए भी सुविधा रखी गयी है जिनकी जमीन उनके पूर्वजों के नाम पर है और जमाबंदी में उनका नाम दर्ज नहीं है.

ऐसे किसान भी इस व्यवस्था का लाभ उठा सकेंगे. इसके अलावा रैयत और गैररैयत किसानों को भी उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा मिलेगी.

इसका मतलब है कि सिर्फ जमाबंदी में नाम दर्ज होने की स्थिति के आधार पर किसान को सुविधा से बाहर नहीं रखा जायेगा. अलग-अलग श्रेणी के किसानों को नयी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की गयी है.

किसान खुद दुकान नहीं जा सकते तो भी नहीं रुकेगी खरीद

कई किसान उम्र, बीमारी या किसी अन्य वजह से खुद दुकान तक नहीं पहुंच पाते हैं. ऐसे किसानों के लिए भी व्यवस्था में विकल्प रखा गया है.

अगर किसान स्वयं दुकान पर जाने में असमर्थ है तो उसकी ओर से कोई दूसरा व्यक्ति उर्वरक लेने जा सकता है. इसके लिए उस व्यक्ति को अपना आधार कार्ड और किसान की ऑनलाइन बुकिंग का क्यूआर कोड या ओटीपी प्रस्तुत करना होगा.

इससे किसान की बुकिंग किसी दूसरे व्यक्ति के माध्यम से पूरी की जा सकेगी.

गांव और प्रखंड स्तर पर मिलेगी ऑनलाइन बुकिंग में मदद

डिजिटल व्यवस्था शुरू होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उन किसानों को जोड़ने की होगी जो मोबाइल एप का इस्तेमाल करने में सहज नहीं हैं. इसके लिए कृषि विभाग ने पंचायत और प्रखंड स्तर पर भी जिम्मेदारी तय की है.

किसानों की ऑनलाइन बुकिंग में मदद करने के लिए किसान सलाहकारों, कृषि समन्वयकों, एटीएम, बीटीएम और प्रखंड कृषि अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गयी है.

इससे उम्मीद है कि डिजिटल प्रक्रिया से अनजान किसान भी स्थानीय स्तर पर सहायता लेकर खाद की बुकिंग कर सकेंगे.

आइएफएमएस और एग्रीस्टैक को जोड़ा गया

यह नयी व्यवस्था आइएफएमएस और एग्रीस्टैक के एकीकरण से तैयार की गयी है. इसका उद्देश्य उर्वरक वितरण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है.

डिजिटल सिस्टम के जरिये उर्वरक की बिक्री और वितरण की पूरी प्रक्रिया की ट्रैकिंग संभव होगी. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि उर्वरक की बिक्री किस तरह और कहां हुई.

यही ट्रैकिंग व्यवस्था फर्जीवाड़े और अनियमितता पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

अधिकारियों और दुकानदारों को दिया जा चुका प्रशिक्षण

नयी व्यवस्था को लागू करने से पहले कृषि विभाग ने अधिकारियों और उर्वरक विक्रेताओं को प्रशिक्षण भी दिया है. कृषि भवन, मीठापुर, पटना में आयोजित प्रशिक्षण सत्र के दौरान कृषि मंत्री ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिये थे.

इसके साथ ही विक्रेताओं और कृषि पदाधिकारियों का ऑनलाइन प्रशिक्षण भी पूरा कराया जा चुका है. यानी व्यवस्था लागू होने से पहले संबंधित लोगों को नये डिजिटल सिस्टम की जानकारी देने की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है.

Fertilizer Online Booking Bihar: कालाबाजारी पर रोक और किसानों को राहत देने की कोशिश

उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना इस पूरी व्यवस्था का अहम उद्देश्य है. डिजिटल बुकिंग और ट्रैकिंग के जरिये उर्वरक की बिक्री पर निगरानी बढ़ेगी. इससे कालाबाजारी और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है.

भागलपुर समेत बिहार के किसानों के लिए अब सबसे अहम बदलाव यह होगा कि खाद की उपलब्धता जानने और अग्रिम बुकिंग करने का विकल्प उनके मोबाइल पर होगा. आने वाले समय में इस व्यवस्था का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि किसान इसे कितनी आसानी से इस्तेमाल कर पाते हैं और उर्वरक की उपलब्धता के साथ बुकिंग की प्रक्रिया कितनी सुचारु रहती है.

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By संजीव झा

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