Bhagalpur News: विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होकर बंद होने का असर अब केवल यातायात तक सीमित नहीं रहा. भागलपुर बाइपास स्थित टोल बूथ की आय में आई भारी गिरावट ने यह संकेत दे दिया है कि सेतु बंद होने का प्रभाव शहर की आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच चुका है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि एनएचएआई ने टोल कलेक्शन एजेंसी से प्रतिदिन ली जाने वाली राशि में करीब 5 लाख रुपये की कमी कर दी है. पहले जहां एजेंसी को प्रतिदिन लगभग 6.25 लाख रुपये एनएचएआई को देने होते थे, वहीं अब यह राशि घटकर करीब 1.30 लाख रुपये प्रतिदिन रह गई है.
यह बदलाव वाहन चालकों द्वारा चुकाए जाने वाले टोल में नहीं, बल्कि एनएचएआई और टोल एजेंसी के बीच हुए अनुबंध से जुड़ा है.
सेतु बंद होते ही बदल गया पूरा गणित
भागलपुर बाइपास टोल बूथ का संचालन मुंबई की एसएस मल्टीसर्विस एजेंसी के पास था, जिसे नवंबर में करीब 6.25 लाख रुपये प्रतिदिन की दर से ठेका मिला था.
लेकिन 3 मई को विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद वाहनों की आवाजाही में तेज गिरावट आई, जिससे टोल कलेक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ.
वाहनों की संख्या कम होने के कारण एजेंसी को प्रतिदिन करीब 5 लाख रुपये तक का नुकसान होने लगा.
एजेंसी ने ठेका छोड़ने की भी पेशकश की थी
लगातार घाटे के कारण मई महीने में एसएस मल्टीसर्विस एजेंसी ने एनएचएआई को ठेका सरेंडर करने का प्रस्ताव दिया था.
इसके बाद जून में दोबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन केवल एक ही बोली मिलने के कारण एजेंसी को ठेका विस्तार दे दिया गया.
जुलाई में फिर टेंडर निकाला गया, जिसमें तीन एजेंसियों ने हिस्सा लिया.
सबसे अधिक बोली एसएस मल्टीसर्विस की 1.30 लाख रुपये प्रतिदिन रही, जिसके आधार पर वर्तमान भुगतान तय किया गया.
कोआ ब्रिज बंद होने से और बढ़ी मुश्किल
विक्रमशिला सेतु के बाद अब कोआ ब्रिज (कौआ ब्रिज) बंद होने से भी स्थिति और जटिल हो गई है.
रूट डायवर्जन के कारण भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे टोल बूथ पर कलेक्शन में और गिरावट आने की आशंका है.
सूत्रों के अनुसार, यदि यही स्थिति बनी रही तो एसएस मल्टीसर्विस एजेंसी अक्टूबर में एक बार फिर ठेका छोड़ने पर विचार कर सकती है.
Bhagalpur News: व्यापार और परिवहन दोनों पर असर
बाइपास टोल बूथ के आंकड़े यह संकेत दे रहे हैं कि भागलपुर की प्रमुख सड़क कनेक्टिविटी प्रभावित होने का असर व्यापार, माल ढुलाई और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है.
व्यापारियों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि रूट बदलने, दूरी बढ़ने और समय अधिक लगने से माल परिवहन की लागत भी बढ़ रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विक्रमशिला सेतु की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर आने वाले महीनों में व्यापार, परिवहन, ईंधन खर्च और स्थानीय बाजार की गतिविधियों पर और स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है.
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