भागलपुर से अतुल तिवारी की रिपोर्ट
भागलपुर में आग से बचाव की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रहा है. शहर में संचालित करीब पांच छोटे-बड़े रेस्टोरेंट में से मात्र 60 से 70 प्रतिष्ठानों के पास ही अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई निजी अस्पतालों में भी आग से बचाव की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है और नियमों को ताक पर रखकर संचालन किया जा रहा है. ऐसे जगहों पर प्रतिदिन हजारों लोग पहुंचते हैं, लेकिन आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं. हाल के दिनों में ओडिशा के अस्पताल में आग लगने से करीब दस लोगों की मौत हो गयी थी. बावजूद ना तो विभाग ने सख्ती बरती और ना ही संस्थानों के संचालकों ने इससे सिख ली. वहीं बुधवार को दिल्ली के होटल में आग लगने से 21 व गुरुवार को मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में आग लगने से कई लोगों की मौत हो गयी है.सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था सबसे लचरभागलपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जेएलएनएमसीएच व सदर अस्पताल में भी आग से बचाव की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है. जेएलएनएमसीएच में दो से तीन माह के अंदर दो बार आग लगने की घटना घट चुकी है. इसे लेकर अग्निशमन विभाग की ओर से अस्पताल प्रबंधन को पत्र भी लिखा गया था. वहीं सदर अस्पताल का एक्स-रे विभाग जिस भवन में संचालित होता है, उसका स्वीच बोर्ड टूटा है. इस कारण कभी भी शार्ट-सर्किट हो सकता है.
अग्निशमन विभाग की व्यवस्थाविभाग के पास दमकल की छोटी गाड़ी नौ है. इसमें आठ थाना में और विभाग के पास. वहीं पांच बड़ी गाड़ी है, जिसमें चार विभाग के पास व एक जगदीशपुर में मौजूद है.लगातार किया जा रहा है मॉकड्रीलडीएफओ संजय कुमार ने बताया कि आग से बचाव के लिये लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है.
