भागलपुर में ‘अग्निकांड’ का इंतजार! क्या भगवान भरोसे सुरक्षित हैं हजारों जिंदगियां?

भागलपुर में 500 में से केवल 70 रेस्टोरेंट के पास फायर एनओसी है. अस्पतालों और रेस्टोरेंट में आग से सुरक्षा के इंतजाम लचर, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा.

भागलपुर से अतुल तिवारी की रिपोर्ट

कागजी एनओसी और सुलगते रेस्टोरेंट

भागलपुर शहर में सैकड़ों छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और खाने-पीने के प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से मात्र 60 से 70 प्रतिष्ठानों के पास ही अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) उपलब्ध है. बाकी के सैकड़ों संस्थान बिना किसी वैध एनओसी के ही धड़ल्ले से चल रहे हैं. इन जगहों पर रोजाना हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं, लेकिन अगर कभी खुदा न खास्ता आग लगने जैसी आपात स्थिति पैदा हो जाए, तो वहां से सुरक्षित निकलने के पर्याप्त इंतजाम तक मौजूद नहीं हैं.

सरकारी और निजी अस्पतालों में लचर इंतजाम

सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति शहर के स्वास्थ्य केंद्रों की है. भागलपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जेएलएनएमसीएच) और सदर अस्पताल में भी आग से बचाव की व्यवस्था बेहद लचर है. जेएलएनएमसीएच में बीते दो से तीन महीने के भीतर ही दो बार आग लगने की घटनाएं घट चुकी हैं. इसके बाद अग्निशमन विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी पत्र भी लिखा, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं दिखा. वहीं, सदर अस्पताल का एक्स-रे विभाग जिस भवन में चल रहा है, वहां का मुख्य स्विच बोर्ड टूटा हुआ है, जिससे कभी भी बड़ा शॉर्ट-सर्किट हो सकता है. निजी अस्पतालों का हाल भी इससे जुदा नहीं है, जहां सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर मरीजों की जान से समझौता किया जा रहा है.

संसाधनों की कमी और जागरूकता का दावा

अग्निशमन विभाग के पास मौजूदा संसाधनों की बात करें तो विभाग के पास दमकल की नौ छोटी गाड़ियां हैं, जिनमें से आठ अलग-अलग थानों में और एक विभाग के पास तैनात है. इसके अलावा पांच बड़ी गाड़ियां हैं, जिनमें से चार विभाग के पास और एक जगदीशपुर में मौजूद है. हालांकि, इस सीमित संसाधन के बीच जिला अग्निशमन पदाधिकारी (डीएफओ) संजय कुमार का कहना है कि विभाग की ओर से आग से बचाव के लिए लगातार अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और विभिन्न जगहों पर मॉकड्रिल भी आयोजित की जा रही है. लेकिन सवाल यह उठता है कि सिर्फ मॉकड्रिल के भरोसे कब तक शहर को सुरक्षित रखा जा सकेगा?

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Published by: Atul Kumar

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