मुख्य बातें:
भागलपुर से ब्रजेश की रिपोर्ट
Bhagalpur Munger Marine Drive Project: भागलपुर और मुंगेर प्रमंडल के विकास को नई रफ्तार देने वाली महात्वाकांक्षी गंगा पथ परियोजना (मरीन ड्राइव) को धरातल पर उतारने की दिशा में बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (BSRDCL) ने अपनी प्रशासनिक गतिविधियां तेज कर दी हैं. निगम ने इस वृहद कॉरिडोर के निर्माण से पहले आवश्यक ‘पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव (NBWL)’ अनापत्ति प्रमाणपत्र (क्लियरेंस) दिलाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड (NABET) से मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ कंसलटेंसी एजेंसी की नियुक्ति के लिए आधिकारिक प्रस्ताव (टेंडर) आमंत्रित किए हैं.
एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में होगा निर्माण; 9 जुलाई तक जमा होंगे प्रस्ताव
- रणनीतिक रूट: बीएसआरडीसीएल द्वारा तैयार ब्लूप्रिंट के अनुसार, यह मरीन ड्राइव मुंगेर के सफियाबाद से शुरू होकर बरियारपुर, घोरघाट, सुल्तानगंज और भागलपुर होते हुए सबौर तक जाएगा.
- एलिवेटेड संरचना: गंगा नदी के समानांतर बनने वाला यह लगभग 82.80 किलोमीटर लंबा मार्ग आंशिक रूप से समतल और आंशिक रूप से ऊंचे पिलरों पर बने ऊंचे मार्ग (एलिवेटेड कॉरिडोर) के रूप में अत्याधुनिक तकनीकों से विकसित किया जाएगा.
- टेंडर की अंतिम तिथि: बीएसआरडीसीएल ने अधिसूचना में स्पष्ट किया है कि इच्छुक विशेषज्ञ एजेंसियों को अपने तकनीकी और वित्तीय प्रस्ताव बिहार सरकार के आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन जमा करने होंगे. पोर्टल पर आवेदन सबमिट करने की अंतिम तिथि 9 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है.
Bhagalpur Munger Marine Drive Project: दो चरणों में होगा निर्माण; कुल लागत ₹9998 करोड़
यह मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट दो अलग-अलग चरणों (फेज) में पूरा किया जाएगा, जिसकी कुल अनुमानित लागत लगभग 9,998 करोड़ रुपये आंकी गई है:
परियोजना का वित्तीय व भौतिक वर्गीकरण:
- प्रथम चरण (फेज-1): इसके तहत मुंगेर के हेरू दियारा से लेकर अजगैबीनाथ धाम सुल्तानगंज तक लगभग 42 किलोमीटर लंबे गंगा पथ का निर्माण किया जाएगा. इस शुरुआती खंड पर कुल 5,119 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.
- द्वितीय चरण (फेज-2): दूसरे हिस्से में सुल्तानगंज से भागलपुर शहर के किनारे होते हुए सबौर तक कुल 48.08 किलोमीटर लंबे पथ का निर्माण प्रस्तावित है. इस चरण पर 4,849 करोड़ रुपये की लागत आएगी. — बीएसआरडीसीएल तकनीकी रिपोर्ट
चूंकि इस पूरी परियोजना का एक बड़ा हिस्सा गंगा नदी के जलीय क्षेत्र और सुल्तानगंज-भागलपुर के गांगेय डॉल्फिन अभ्यारण्य (सेंचुरी) के करीब से गुजरता है, इसलिए निर्माण कार्य शुरू करने से पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और वन्यजीव बोर्ड की हरी झंडी मिलना अनिवार्य है. विशेषज्ञ एजेंसी का चयन होते ही हाइड्रोलॉजिकल सर्वे और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की रिपोर्ट तैयार कर अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए भेजी जाएगी, जिसके बाद मुख्य सड़क निर्माण का टेंडर जारी होगा.
