भागलपुर. गंगा के उफनाने के बाद शहर के दीपनगर स्थित नया टोला में बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया है. करीब 100 घर पानी से घिरे हैं, जबकि कई घरों में तीन से चार फीट तक पानी पहुंच गया है. स्थिति बिगड़ने के बाद कुछ परिवारों ने घर खाली करना शुरू कर दिया है. निचले हिस्से में रहने वाले परिवारों के सामने अब सुरक्षित स्थान पर जाने की मजबूरी है. कई परिवार घर के अंदर चौकी लगाकर उसके ऊपर रहने को विवश हैं.
दो दिनों में तेजी से बढ़ा पानी, घरों में कैद हुई जिंदगी
स्थानीय लोगों के अनुसार बुधवार से इलाके में पानी आना शुरू हुआ था, लेकिन शनिवार को जलस्तर तेजी से बढ़ गया. पानी बढ़ने से घरों में रखा सामान भी प्रभावित हुआ है. कई परिवार पानी के बीच ही खाना बनाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं. महिलाएं एक ओर घर का सामान सुरक्षित रखने में जुटी हैं तो दूसरी ओर बच्चों को संभाल रही हैं. पानी भर जाने के कारण खाने-पीने समेत रोजमर्रा की जरूरतों का सामान जुटाना भी मुश्किल हो गया है.
वीडियो देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.
30 से 35 साल से रह रहे, हर साल झेलते हैं बाढ़
स्थानीय लोगों ने बताया कि वे पिछले 30 से 35 वर्षों से इस इलाके में रह रहे हैं और हर साल बाढ़ का पानी झेलते हैं. उनके अनुसार बाढ़ का पानी करीब एक से डेढ़ महीने तक इलाके में जमा रहता है.
जलस्तर बढ़ने पर निचले हिस्से में रहने वाले परिवारों को घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है. लोगों का कहना है कि हर वर्ष ऐसी स्थिति उत्पन्न होने के बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में पर्याप्त काम नहीं हुआ है.
‘हमलोगों की भी जिंदगी है, पानी में कैसे रहें’
काली ठाकुर लेन निवासी सौरभ कुमार ने बताया कि पानी बढ़ने के बाद लोगों के सामने घर छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता. स्थानीय एक महिला ने कहा कि हमलोगों की भी जिंदगी है, इस पानी में आखिर कब तक रहेंगे.
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि इलाके में आये, हालात देखे और चले गये, लेकिन इसके बाद दोबारा स्थिति देखने नहीं पहुंचे. लोगों का कहना है कि बाढ़ के दौरान उन्हें तत्काल राहत और सुरक्षित स्थान की जरूरत है.
दस साल से राहत सामग्री नहीं मिलने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले दस वर्षों के दौरान बाढ़ के समय उन्हें कोई राहत सामग्री नहीं मिली. उनके अनुसार एक बार ही खाने-पीने का सामान उपलब्ध कराया गया था और वह भी पार्षद संजय सिन्हा के प्रयास से. लोगों का कहना है कि इस बार भी अब तक कोई राहत नहीं पहुंची है. उनका कहना है कि बाढ़ से घिरे परिवारों और बच्चों की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को तत्काल राहत सामग्री, सुरक्षित स्थान और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए.
