गंगा का पानी बड़ुआ और खड़गपुर डैम तक पहुंचाने की 1866 करोड़ की योजना आगे बढ़ी, वन मंत्रालय से मांगी गई अनुमति

बिहार सरकार की 1866.11 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना, गंगा के बाढ़ के पानी को बड़ुआ और खड़गपुर जलाशयों तक पहुंचाने के लिए, अब वन मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है. यह परियोजना सुखाड़ के दौरान किसानों के लिए वरदान साबित होगी.

Bhagalpur News: भागलपुर, बांका और मुंगेर के किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगा देने वाली एक बड़ी परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है. बिहार सरकार की 1866.11 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना, जिसके तहत गंगा नदी के अतिरिक्त बाढ़ के पानी को लिफ्ट कर बड़ुआ और खड़गपुर जलाशयों तक पहुंचाया जाएगा, अब वन मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है. सिंचाई विभाग ने 10 अगस्त को भारत सरकार के वन मंत्रालय से औपचारिक अनुमति मांगते हुए आवेदन भेज दिया है. यदि मंजूरी मिल जाती है, तो यह परियोजना उन इलाकों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है जहां हर साल सुखाड़ के दौरान खेतों तक पानी पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है.

क्या है बड़ुआ-खड़गपुर डैम गंगाजल परियोजना

इस परियोजना का उद्देश्य गंगा नदी में बाढ़ के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल का उपयोग करना है. सामान्य तौर पर यह पानी बहकर आगे निकल जाता है, लेकिन योजना के तहत इसे आधुनिक पंपिंग सिस्टम के जरिए उठाकर बड़ुआ और खड़गपुर जलाशयों में संग्रहित किया जाएगा. बाद में इसी पानी का उपयोग सुखाड़ और कम बारिश के समय सिंचाई के लिए किया जाएगा.

इस योजना से भागलपुर, बांका और मुंगेर जिले के बड़े कृषि क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है. खासकर उन किसानों को राहत मिल सकती है जो हर साल मानसून की अनिश्चितता और सूखे जैसी स्थिति के कारण फसल नुकसान झेलते हैं.

वन मंत्रालय की मंजूरी क्यों जरूरी है

परियोजना का कुछ हिस्सा वन क्षेत्र और पेड़ों से प्रभावित हो रहा है. इसी वजह से सिंचाई विभाग ने वन मंत्रालय से अनुमति मांगी है. अब मंत्रालय की स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा.

इस चरण को परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि मंजूरी के बाद भूमि, निर्माण और तकनीकी कार्यों की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी.

124 पेड़ कटेंगे, 99 पेड़ों का होगा स्थानांतरण

बांका वन प्रमंडल की ओर से परियोजना क्षेत्र में आने वाले पेड़ों की गणना पूरी कर ली गई है. रिपोर्ट के अनुसार 124 पेड़ों को काटना होगा, जबकि 99 पेड़ों का ट्रांसलोकेशन यानी एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण किया जाएगा.

प्रभावित पेड़ों में पीपल, बरगद, आम, जामुन, महुआ, सागवान, कटहल, पलाश, गुलहर, गमहार, बेल, सहजन, रोजवुड, सिरिस और अन्य स्थानीय प्रजातियां शामिल हैं. वन विभाग की मंजूरी के साथ पर्यावरणीय शर्तों का पालन भी परियोजना का अहम हिस्सा रहेगा.

परियोजना के तहत क्या-क्या बनेगा

योजना के तहत सुलतानगंज के पास इनटेक वेल कम पंपहाउस का निर्माण किया जाएगा. यहां लगाए जाने वाले पंप प्रति मिनट 3,47,225 लीटर पानी उठाने की क्षमता रखेंगे.

इसके अलावा बांका जिले के बिजिखोरवा सिंचाई कॉलोनी में एक अन्य पंपिंग सिस्टम स्थापित होगा जिसकी क्षमता 2,75,697 लीटर प्रति मिनट होगी.

परियोजना में डिटेंशन टैंक कम पंपहाउस, एप्रोच चैनल, बड़ी पाइपलाइन, सर्विस रोड, कार्यालय और स्टाफ क्वार्टर, बाउंड्री वॉल, डायवर्जन रोड, प्रेशर मेन, इलेक्ट्रो-मैकेनिकल और हाइड्रो-मैकेनिकल सिस्टम तथा सबस्टेशन से पंपहाउस तक विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी.

किसानों की सबसे बड़ी समस्या का समाधान

भागलपुर और बांका क्षेत्र में कई इलाकों में खेती आज भी बारिश पर काफी हद तक निर्भर है. मानसून कमजोर पड़ने पर धान, मक्का और अन्य फसलों की सिंचाई प्रभावित होती है. ऐसे समय में यदि जलाशयों में पर्याप्त पानी उपलब्ध हो, तो रबी और खरीफ दोनों मौसम की खेती को बड़ा सहारा मिल सकता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि गंगा के अतिरिक्त बाढ़ जल का संरक्षित उपयोग लंबे समय में जल प्रबंधन, कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है.

स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा फायदा

इतनी बड़ी परियोजना शुरू होने पर निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में श्रमिकों, तकनीकी कर्मचारियों, मशीन ऑपरेटरों, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, परिवहन और निर्माण सामग्री कारोबार से जुड़े लोगों को काम मिलने की संभावना है. परियोजना पूरी होने के बाद रखरखाव और संचालन से भी स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं.

Bhagalpur News: आगे क्या होगा

फिलहाल पूरी परियोजना वन मंत्रालय की अनुमति प्रक्रिया में है. स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण एजेंसियों की तैनाती, तकनीकी कार्य, पंपिंग सिस्टम की स्थापना और पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने का काम चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा.

यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो आने वाले वर्षों में भागलपुर, मुंगेर और बांका के किसानों को सुखाड़ के समय सिंचाई के लिए गंगा का पानी उपलब्ध कराने की दिशा में यह बिहार की सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में से एक बन सकती है.

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By संजीव झा

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