हर दूसरे दिन बाबा धाम में जलाभिषेक, सप्ताह में 3 बार 105 किमी 'डाक बम' यात्रा करते हैं कन्हैया

भागलपुर के कन्हैया कुमार 'कन्हैया बम' के नाम से प्रसिद्ध हैं, जो सावन में हर दूसरे दिन 105 किलोमीटर की कठिन 'डाक बम' यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करते हैं. उनकी अटूट शिवभक्ति और अनोखी दिनचर्या ने उन्हें कांवरिया पथ पर एक मिसाल बना दिया है.

सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज से देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की कांवर यात्रा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर 105 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी करना हर किसी के बस की बात नहीं होती, खासकर जब बात 'डाक बम' यात्रा की हो. लेकिन भागलपुर जिले के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत संत नगर टोला निवासी शिक्षक कन्हैया कुमार (कन्हैया बम) ने अपनी अटूट शिवभक्ति से एक मिसाल पेश की है.

सावन में हर दूसरे दिन करते हैं बाबा का जलाभिषेक

गोपालपुर थाना क्षेत्र के गोसाई गांव पंचायत निवासी कन्हैया कुमार को कांवरिया पथ पर लोग बेहद आदर के साथ 'कन्हैया बम' के नाम से पुकारते हैं. उनकी साधना का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे सावन के महीने में हर दूसरे दिन बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर जलार्पण करते हैं. वे एक सप्ताह में तीन बार सुल्तानगंज से देवघर तक की करीब 105 किलोमीटर लंबी कठिन 'डाक बम' यात्रा बिना रुके पूरी करते हैं.

6 दिन शिवभक्ति को समर्पित, केवल शनिवार को रहते हैं घर

कन्हैया बम की दिनचर्या आम श्रद्धालुओं से काफी अलग और कठिन है:

  • रविवार व सोमवार: रविवार को सुल्तानगंज से जल उठाकर पैदल यात्रा शुरू करते हैं और सोमवार को जलाभिषेक करते हैं.
  • मंगलवार व बुधवार: मंगलवार को पुनः गंगाजल उठाकर बुधवार को बाबा धाम में जल चढ़ाते हैं.
  • गुरुवार व शुक्रवार: गुरुवार को तीसरी बार डाक बम यात्रा शुरू कर शुक्रवार को जलाभिषेक करते हैं.
  • शनिवार: सप्ताह के छह दिन निरंतर यात्रा के बाद केवल शनिवार का दिन ऐसा होता है, जब वे अपने घर पर विश्राम करते हैं.

सावन के बाद भी जारी रहता है संकल्प का सिलसिला

कन्हैया बम की यह भक्ति केवल सावन माह तक ही सीमित नहीं रहती. वे साल भर प्रत्येक माह की पूर्णिमा पर सुल्तानगंज से जल उठाकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं. कांवरिया पथ पर बने सेवा शिविरों के कार्यकर्ता भी कन्हैया बम का बेसब्री से इंतजार करते हैं. कन्हैया कुमार का कहना है कि भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था ही उनकी वास्तविक ऊर्जा है, जिसके आगे शारीरिक थकान और रास्ते की कठिन दूरियां बौनी साबित होती हैं.


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By Vipin Thakur

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