bhagalpur news. सृजन घोटाला : भागलपुर के तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह पर बड़ी कार्रवाई, सरकार ने रोकी 100% पेंशन

सामान्य प्रशासन विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भागलपुर के तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह की शत-प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया है.

बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध राज्य सरकार का शिकंजा कसता जा रहा है. इसी क्रम में सामान्य प्रशासन विभाग ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भागलपुर के तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी राजीव रंजन सिंह की शत-प्रतिशत पेंशन स्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया है. सेवानिवृत्त हो चुके बिहार प्रशासनिक सेवा के इस अधिकारी पर अरबों रुपये के सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप है. क्या है पूरा मामला? मामला भागलपुर जिला भू-अर्जन कार्यालय से जुड़ा है. राजीव रंजन सिंह जब भागलपुर में तैनात थे, तब उनके पदस्थापन काल के दौरान सरकारी खातों की भारी-भरकम राशि अवैध तरीके से ”सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड, सबौर” के बैंक खातों में स्थानांतरित की गयी थी. यह खेल फर्जी चेक और जालसाजी के जरिए अंजाम दिया गया था. इनके खिलाफ सरकारी वारंट निर्गत होने के बाद बिना छुट्टी स्वीकृत कराये ही मुख्यालय से फरार हो गये थे. इसके बाद 14.08.2017 को सिंह ने अपना छुट्टी आवेदन डीएम को भेजा, जिसे 28.08.2017 को अस्वीकृत करते हुए इसकी सूचना डीएम ने इ-मेल पर भेजी थी. फिर भी वे ड्यूटी पर नहीं लौटे. मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया. करोड़ों के गबन और प्राथमिकी का आधार जिलाधिकारी द्वारा गठित आरोप पत्र और वरीय पुलिस अधीक्षक की सूचना के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी राशि को निजी स्वार्थ के लिए सृजन संस्था के खाते में भेजा गया. इस मामले में 08 अगस्त, 2017 को भागलपुर के कोतवाली थाना में कांड संख्या-500/17 दर्ज की गयी थी, जिसमें राजीव रंजन सिंह को प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया था. उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी खजाने को भारी क्षति पहुंचायी. आरोपित पदाधिकारी को भेजी गयी चिट्ठी लौटी थी बैरंग आरोपित पदाधिकारी को गठित आरोपों के लिए उनके बचाव पक्ष जानने के लिए पत्र भेजा गया था, जो बिना तामिला के वापस आ गया था. इसके बाद प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बचाव पक्ष मांगा गया. इसके बाद भी पक्ष नहीं मिला. फिर विभागीय कार्यवाही संचालित की गयी. बिना आदेश के खोला गया था खाता जिलाधिकारी ने 22.11.2018 को विभाग को पूरक आरोप पत्र भेजा था. इसमें कहा गया था कि बैंक ऑफ बड़ौदा की घंटाघर शाखा में जिला भू-अर्जन कार्यालय का खाता 01.07.2014 को बिना किसी सक्षम प्राधिकार के आदेश के ही सिंह ने खोला था. यह आपराधिक मंशा दर्शाता है. विभाग को 27.08.2019 को यह सूचना मिली कि सिंह जेल में बंद है. इसके बाद उनके जेल से मुक्त होने तक कार्यवाही स्थगित रखने का निर्णय लिया गया. इसके बाद 23.12.2021 को कार्यवाही शुरू करने का निर्देश जारी हुआ. विभागीय जांच हुई और आयोग ने दी सहमति आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की थी. बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) से भी इस दंड के प्रस्ताव पर विमर्श किया गया. आयोग ने 09 मार्च, 2026 को पत्र भेजकर सेवानिवृत्त अधिकारी के विरुद्ध ”शत-प्रतिशत पेंशन अवरुद्ध” करने के कड़े दंड पर अपनी सहमति व्यक्त की. इसके बाद बिहार राज्यपाल के आदेश से विभाग ने अंतिम संकल्प जारी कर दिया. पेंशन नियमावली के तहत कड़ी कार्रवाई सरकार ने बिहार पेंशन नियमावली के नियम-43 (बी) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कार्रवाई की है. इस नियम के तहत यदि कोई सरकारी सेवक सेवाकाल के दौरान किसी बड़े कदाचार या वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया जाता है, तो सरकार को उसकी पेंशन रोकने का अधिकार है. अब राजीव रंजन सिंह को भविष्य में किसी भी प्रकार की पेंशन राशि का लाभ नहीं मिल सकेगा. इस आदेश की प्रति महालेखाकार, बिहार और भागलपुर के जिलाधिकारी समेत सभी संबंधित विभागों को भेज दी गयी है.

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By SANJEEV KUMAR JHA

SANJEEV KUMAR JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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