तेल रिपैकेजिंग के आरोपितों को थाने से मिला बेल

एमओ ने देर शाम कजरैली थाने में एमएफ ट्रेडर्स के मालिक सैफ अली व उसके भाई मो ओवैस पर केस दर्ज कराया है. उधर कजरैली पुलिस ने ओवैस व मजदूर को रात को बांड भरवा कर थाने से बेल दे दिया.

कजरैली थानाक्षेत्र के तेतरहार रोड में तेल रिपैकेजिंग कारोबार मामले में विभाग ने फूड, जीएसटी, लेबर, प्रदूषण आदि विभाग को कोई जानकारी नहीं दी. वरीय अधिकारियों ने भी इसकी जांच के लिए टीम गठित नहीं की. बिना संबंधित विभाग से जांच कराये आपूर्ति निरीक्षक कुमार अभिजीत के बयान पर केस दर्ज कर लिया गया. एमओ ने देर शाम कजरैली थाने में एमएफ ट्रेडर्स के मालिक सैफ अली व उसके भाई मो ओवैस पर केस दर्ज कराया है. उधर कजरैली पुलिस ने मौके पर से हिरासत मे लिये गये ओवैस व मजदूर को रात को बांड भरवा कर थाने से बेल दे दिया. गोदाम से बरामद करीब साढ़े पांच लाख रुपए भी बिना इनकमटैक्स विभाग से जांच कराये आरोपितों को लौटा दिये गये. उधर फूड इंस्पेक्टर व स्टेट जीएसटी ज्वाइंट कमिश्नर ने कहा कि विभाग द्वारा उन्हें बुलाना चाहिए था. क्योंकि संबंधित मामले की विशेष जानकारी उस विभाग के पास रहती है. बुलाये जाने पर गहरायी से जांच हो पाती. फूड इंस्पेक्टर बोले, पुलिस द्वारा जब्त किया गया सैंपल नहीं लेंगे, अब इस मामले में कुछ नहीं हो सकता फूड इंस्पेक्टर मो इकबाल ने बताया कि नियमानुसार फूड मामले की जांच के लिए उन्हें बुलाया जाना चाहिए था. वह खुद गोदाम जाकर सैंपल लेते और फिर उसे जांच में भेजते. पुलिस या आपूर्ति विभाग द्वारा लिया गया सैंपल वह स्वीकार नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि अब तो गोदाम भी सील हो गया. अब तो सैंपल भी नहीं ले सकते. अब इस मामले में कुछ भी नहीं हो सकता है. ऐसे में बिना सैंपल जांच किये ये साबित करना मुश्किल होगा कि उक्त तेल खाने योग्य है या नहीं. इसका लाभ आरोपितों को मिल सकता है. मुंगेर के पते पर जीएसटी, विभाग से हो सकती है जांच उक्त तेल गोदाम मालिक ने जीएसटी का लाइसेंस मुंगेर के पते पर लिया है. फिलहाल वो भागलपुर के कजरैली थानाक्षेत्र में कारोबार चला रहा है. आशंका है कि इनकम व सेल टैक्स की कहीं चोरी तो नहीं हो रही है. स्टेट जीएसटी के ज्वाइंट कमिश्नर मिनी ने कहा कि उन्हें या मुंगेर के जीएसटी कमिश्नर को आपूर्ति विभाग द्वारा जानकारी पत्र द्वारा देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि टैक्स सही से दे रहा है या नही व कारोबार का पता भागलपुर भी दिखाया गया है या नहीं, ये जांच का विषय है. श्रम कमिश्नर ने भी कहा कि उक्त मजदूर को मजदूरी सही से मिल रहा है या नहीं. या फिर कम उम्र के मजदूर अगर मशीन चला रहे हैं तो इसकी जांच व कार्रवाई के लिए उनका विभाग है. जानकारी देने पर उचित कार्रवाई कर पायेंगे. एक ही गोदाम मे पेंटिग, खाना, पैकिंग सब हो रहा था जिस गोदाम में तेल का कारोबार चल रहा था वहां टीन की सफाई, पेंटिंग आदि हो रही थी. पेंट, एसिड, गैस सिलिंडर ऐसे ही खुले में पड़े थे. मजदूरों की खाना की थाली भी खुले में पड़ी थी. फूड इंस्पेक्टर मो इकबाल ने कहा कि खाने युक्त सामग्री से अन्य सामग्री को दूर रखने का नियम है. पर जब उनसे पूछा गया कि लाइसेंस कैसे दिया गया और बीच बीच में इसकी जांच होती है या नहीं, तो वो यह कहकर निकल गये कि पहले जांच हुई थी. छापेमारी होते ही होने लगा पैरवी, एक पुलिसकर्मी लग गये सेटिंग में गोदाम में जैसे ही छापेमारी शुरू हुई कि गोदाम मालिक पैरवी कराने मे जुट गये. कई जगहों से अफसरों को फोन आया. छापेमारी में पहुंचे कजरैली थाने के एक एसआइ को कहीं से फोन आया और वो वहां से निकल गये. सूत्रों कि माने तो उसी दारोगा के माध्यम से पहले केस न करने को लेकर पैरवी हुई. जब बात मीडिया में आ गयी तो रात को केस हुआ. हालांकि कजरैली थानाध्यक्ष गौतम कुमार ने पत्रकारों को बताया कि एमओ के कहने पर बांड पर गोदाम मालिक व मजदूर को छोड़ा गया है. उसे पैसे भी एमओ के सामने दे दिया गया है. गोदाम मालिक जांच में सहयोग करेगा. कोट तेल गोदाम संचालन संबंधित कागजात की जांच के लिए संबंधित विभाग को प्रतिवेदन दिया जायेगा. फूड विभाग के अधिकारी भी जाकर जांच करेंगे. हर बिंदु पर जांच व कार्रवाई होगी. विकास कुमार, एसडीओ सदर

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