अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की भागलपुर इकाई ने विश्वविद्यालय में व्याप्त प्रशासनिक लचरता और छात्र समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है. विद्यार्थी परिषद के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने छात्रहित से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय के कुलसचिव (Registrar) से मुलाकात की और 12 सूत्री मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा. छात्र नेताओं ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि विवि प्रशासन ने समय रहते इन जायज मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा.
12 सूत्री मांगों में सुरक्षा, रिजल्ट और प्रमाण-पत्र का मुद्दा प्रमुख
अभाविप द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में विश्वविद्यालय परिसर और विभिन्न छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का मामला प्रमुखता से उठाया गया है. इसके अलावा समय पर परीक्षा एवं नामांकन प्रक्रिया संपन्न कराने, लंबित परीक्षा परिणाम (रिजल्ट) और अंकपत्र (मार्कशीट) में त्रुटियों को दूर कर अविलंब जारी करने, मूल डिग्री प्रमाण-पत्र मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी को समाप्त करने, सभी विभागों में नियमित वर्ग संचालन सुनिश्चित करने तथा परिसरों में शुद्ध पेयजल और साफ-सुथरे शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं की बहाली की मांग मजबूती से रखी गई है.
'5 दिनों में हो त्वरित कार्रवाई, वरना आर-पार की लड़ाई': छात्र नेता
ज्ञापन सौंपने के बाद अभाविप के प्रदेश सह मंत्री कुणाल पांडेय और जिला संयोजक पियूष भरती ने विश्वविद्यालय प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने वाले हजारों छात्र-छात्राओं की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान होना बेहद आवश्यक है. छात्र नेताओं ने कहा कि कुलपति इस गंभीर विषय पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पांच दिनों के भीतर ठोस कदम उठाएं. यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो विद्यार्थी परिषद विवि का चक्का जाम करने और आर-पार के आंदोलन के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जवाबदेही प्रशासन की होगी.
प्रतिनिधिमंडल में ये प्रमुख कार्यकर्ता रहे उपस्थित
कुलसचिव को ज्ञापन सौंपने के दौरान विद्यार्थी परिषद के दर्जनों छात्र नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे. इस मौके पर मुख्य रूप से जिला विस्तारक राजीव रंजन कुमार, विभाग संयोजक सूर्य प्रताप, किशन सोनी, अमन राय, राजा यादव, नीरज भगत और ऋषि महतो सहित कई प्रमुख सदस्य उपस्थित थे. सभी ने एक सुर में कहा कि छात्र हितों के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा.
