Bhagalpur News: सोशल मीडिया पर जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, पुलिस ने बताए साइबर ठगी से बचने के चार गुरुमंत्र

डिजिटल दौर में मानव जीवन को आसान कर दिया है तो दूसरी तरफ साइबर अपराध में बढ़ोतरी चिंता का विषय है

डिजिटल दौर में मानव जीवन को आसान कर दिया है तो दूसरी तरफ साइबर अपराध में बढ़ोतरी चिंता का विषय है. साइबर अपराध में दिनों दिन बढ़ोतरी को देखते हुए बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग को लेकर एडवाइजरी जारी की है. पुलिस ने कहा कि थोड़ी सी चूक भी लोगों को ठगी का शिकार बना सकती है. भागलपुर साइबर थाने की पुलिस ने उक्त एडवाइजरी को आमलोगों के साथ साझा किया है. पुलिस ने इस दिशा में चार मूल मंत्र लोगों के साथ साझा की है.

1. मजबूत पासवर्ड रखें

सोशल मीडिया अकाउंट के लिए हमेशा ऐसा पासवर्ड रखें जो आसानी से अनुमान न लगाया जा सके. पासवर्ड में बड़े और छोटे अक्षर, अंक और विशेष चिह्नों का मिश्रण होना चाहिए. अलग-अलग अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड रखना अधिक सुरक्षित माना जाता है. इसके साथ ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन करने से अकाउंट की सुरक्षा और मजबूत हो जाती है.

2. निजी जानकारी सुरक्षित रखें

अपना मोबाइल नंबर, घर का पता, लोकेशन या बैंक से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें. कई बार अपराधी इन्हीं जानकारियों का गलत इस्तेमाल करते हैं. प्राइवेसी सेटिंग का सही उपयोग कर यह तय करें कि आपकी प्रोफाइल कौन देख सकता है. जितनी कम जानकारी सार्वजनिक होगी, उतना ही आप सुरक्षित रहेंगे.

3. संदिग्ध प्रोफाइल से सावधान रहें

सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. किसी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले उसकी प्रोफाइल की जांच जरूर करें. संदिग्ध लिंक, मैसेज या ऑफर पर क्लिक करने से बचें. थोड़ी सी सतर्कता आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है.

4. असुरक्षित नेटवर्क से दूर रहें

पब्लिक वाईफाई नेटवर्क अक्सर सुरक्षित नहीं होते और हैकर्स इनका फायदा उठाते हैं. ऐसे नेटवर्क पर बैंकिंग या निजी जानकारी साझा करना खतरनाक हो सकता है. हमेशा भरोसेमंद और सुरक्षित इंटरनेट कनेक्शन का ही उपयोग करें. जरूरत पड़ने पर मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है.

केस स्टडी – लोन ऐप के माध्यम से लीक हो गयी प्राइवेट तस्वीर, ब्लैकमेलिंग का प्रसार कर रहा है साइबर ठग

जोगसर थाना क्षेत्र एक युवक ने एक लोन ऐप इंस्टाल किया था. ऐप का दावा था कि वह 10 से 50 हजार रुपये का ऋण दस मिनट में अप्रूव कर देता है. युवक ने अपने मोबाइल में ऐप इंस्टॉल किया. लोन तो नहीं मिला, लेकिन ऐप के माध्यम से मोबाइल गैलरी का एक्सेस साइबर ठगों को मिल गया. लिहाजा युवक की प्राइवेट तस्वीर साइबर ठगों के पास चली गयी. अब प्राइवेट तस्वीर को एआइ पर न्यूड बना कर साइबर ठगों द्वारा युवक के रिश्तेदारों को भेजा जा रहा है. इन हरकतों को बंद करने के लिए युवक से पैसे की मांग की जा रही थी. युवक जोगसर पुलिस के पास गया. थानाध्यक्ष मंटू कुमार ने युवक को तुरंत साइबर थाना भेजा. साइबर थाने में युवक को तत्काल राहत मिली. साइबर पुलिस ठगों की पहचान करने के लिए छानबीन में जुट गयी है.

कोर्ट

साइबर ठगी से बचने के लिए सर्तकता की एक ही मात्र उपाय है. इसलिए लोग साइबर अपराध और साइबर अपराधियों के तरीके के प्रति सावधान हो जाएं तो अपराधी अपने चाल में कभी सफल नहीं होंगे. साइबर ठगी के शिकार हो जाएं तो तुरंत 1930 पर कॉल पर शिकायत करें.

कनिष्क श्रीवास्वत, साइबर डीएसपी सह थानाध्यक्ष, साइबर थाना, भागलपुर

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By ATUL KUMAR

ATUL KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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