बीमार न कर दे हरी सब्जियों का शौक

भागलपुर: शहर के विभिन्न सब्जी बाजारों में हरी सब्जियों को केमिकल एवं रंग के जरिये तरोताजा दिखाया जा रहा है. इन सब्जियों को खाने से एलर्जिक रिएक्शन होने की आशंका के साथ-साथ लीवर-किडनी संबंधी बीमारी होने की आशंका रहती है. इन पर चढ़ाया जाता है रंग : करेला, लौकी, नेनुआ, मिरची, परवल, भिंडी, शिमला मिर्च […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 8, 2016 8:07 AM
भागलपुर: शहर के विभिन्न सब्जी बाजारों में हरी सब्जियों को केमिकल एवं रंग के जरिये तरोताजा दिखाया जा रहा है. इन सब्जियों को खाने से एलर्जिक रिएक्शन होने की आशंका के साथ-साथ लीवर-किडनी संबंधी बीमारी होने की आशंका रहती है.
इन पर चढ़ाया जाता है रंग : करेला, लौकी, नेनुआ, मिरची, परवल, भिंडी, शिमला मिर्च जैसे अन्य हरी सब्जियाें पर हरा रंग चढ़ाया जाता है. इनमें सबसे ज्यादा करेला, लौकी व परवल की होती है. ये सब्जियां मंडी से खरीदने जाने के एक-दो दिन में अपनी रंगत खोने लगती हैं. इसी तरह आलू में ब्राउन और केले के लिए पीले रंग का इस्तेमाल किया जा रहा है.
रंग और बीमारी
हरी सब्जी का हरा रंग : लीवर में सूजन, पेट में दर्द
फूल गोभी में ब्लीचिंग पाउडर : स्कीन में रूखापन और त्वचा रोग
आलू में लाल रंग : पेट में हेपेटाइटिस होने का खतरा
केले में कार्बाइड-पीला रंग : गले का धीरे-धीरे बैठना और घेंघा रोग
सेब को वैक्स से पॉलिशिंग : आंत में सूजन, अधिक दिनों तक सेवन से आंत का कैंसर होने की आंशका
क्या कहते हैं डाॅक्टर
केमिकल और रंग चढ़ी हरी सब्जियों का सेवन स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत ही खतरनाक है. अगर आप लगातार खा रहे हैं तो इसका असर लीवर और किडनी पर पड़ता है. यहां तक कैंसर भी होने की आशंका रहती है. केमिकल के जरिये पकाये गये केले के सेवन से भी गला धीरे-धीरे बैठने लगता है.
डॉ हेमशंकर शर्मा, अध्यक्ष एपीआइ बिहार