Bhagalpur news नामांकित 31 हजार में 28 हजार छात्र-छात्राएं उपस्थित, 3145 अनुपस्थित
सुलतानगंज प्रखंड के 73 प्राथमिक व 84 मवि में वार्षिक मूल्यांकन (2025-26) के कल तक होगा. उसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का कार्य होगा. अब तक नामांकित 31,417 छात्र-छात्राओं में 28,272 ने परीक्षा में भाग लिया, जबकि 3,145 बच्चे अनुपस्थित रहे. अनुपस्थित छात्रों की संख्या चिंताजनक रही. बीआरसी के लेखापाल पवन कुमार के अनुसार वर्गवार उपस्थिति में प्रथम कक्षा के 2,873 में 2,585, द्वितीय के 3,320 में 2,988, तृतीय के 3,907 में 3,516, चतुर्थ के 4,331 में 3,897, पंचम के 4,497 में 4,047, षष्ठम के 4,185 में 3,796, सप्तम के 4,414 में 3,972 तथा अष्टम के 3,890 में 3,501 छात्र-छात्राएं परीक्षा में उपस्थित रहे. परीक्षा के बाद अब उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का कार्य 19 मार्च से शुरू होगा, जो 24 मार्च तक चलेगा. यह प्रक्रिया सभी कॉम्पलेक्स रिसोर्स सेंटर (सीआरसी) पर आयोजित की जायेगी, जहां शिक्षकों की तैनाती कर मूल्यांकन कार्य पूरा कराया जायेगा.
बीईओ ने दिये सख्त निर्देश
बीईओ तन्नु कुमारी ने सभी सीआरसी संचालकों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सहायक परीक्षक एवं मुख्य परीक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर निर्धारित समय में कार्य पूरा कराना सुनिश्चित करें. वर्ग तीन से आठ तक के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, मूल्यांकन पंजी संधारण और प्रगति पत्रक तैयार करने का कार्य समयबद्ध तरीके से किया जायेगा. 21 और 22 मार्च को अवकाश रहने से इन तिथियों को छोड़ कर अन्य दिनों में जांच कार्य किया जायेगा. मूल्यांकन कार्य पूर्ण होने के बाद विद्यालयों में छात्रों को प्रगति पत्रक 30 मार्च को वितरित किया जायेगा. शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि समय पर परिणाम जारी कर नये शैक्षणिक सत्र की तैयारी को गति दी जाये.
ग्रामीण क्षेत्र में उपस्थिति चुनौती
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों का मानना है कि अनुपस्थित छात्रों की संख्या का मुख्य कारण ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, पारिवारिक जिम्मेदारियां तथा कुछ जगहों पर विद्यालयों में नियमित उपस्थिति का अभाव है. कई बच्चे परीक्षा के दौरान भी स्कूल नहीं पहुंच सके, जिससे उनकी शैक्षणिक प्रगति प्रभावित हो सकती है.
गुणवत्ता सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा आयोजित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों की नियमित उपस्थिति, सीखने की गुणवत्ता और अभिभावकों की सहभागिता को बढ़ाना आवश्यक है. वार्षिक मूल्यांकन ने जहां शिक्षा व्यवस्था की व्यापकता को दर्शाया है, वहीं छात्रों की अनुपस्थिति ने विभाग के सामने नयी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इन चुनौतियों से कैसे निबटता है और आने वाले सत्र में बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है.
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