भागलपुर : रेप्टीलिया वर्ग के सबसे बड़े जंतुओं में एक मगरमच्छ आनेवाले दिनों में विशेष परिस्थिति से लड़ने के काबिल बन सकेंगे. आम लोगों को इससे डरने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि कहीं पर मगरमच्छ के फंस जाने पर वापस नदियों में भेजने की भी व्यवस्था होगी. वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि भागलपुर […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
भागलपुर : रेप्टीलिया वर्ग के सबसे बड़े जंतुओं में एक मगरमच्छ आनेवाले दिनों में विशेष परिस्थिति से लड़ने के काबिल बन सकेंगे. आम लोगों को इससे डरने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि कहीं पर मगरमच्छ के फंस जाने पर वापस नदियों में भेजने की भी व्यवस्था होगी.
वन विभाग के सूत्रों ने बताया कि भागलपुर में वन एवं पर्यावरण विभाग ने मगरमच्छ के लिए रेस्क्यू एंड रेहेबिलिटेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय ले लिया है. इसके साथ-साथ सेंटर स्थापना का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज भी दिया गया है. सरकार से अनुमति मिलते ही केंद्र की स्थापना को लेकर निर्माण कार्य शुरू हो जायेगा.
सुंदरवन में हो सकता है स्थान का चयन : मगरमच्छ रेस्क्यू एंड रिहेबिलिटेशन सेंटर का निर्माण सुंदरवन में हो सकता है. यह सुरक्षित स्थल भी है और इसके समीप पशुपालन विभाग का जिला अस्पताल अवस्थित है. Âबाकी पेज 15 पर
यहीं पर वन विभाग का कार्यालय भी है. कुल मिला कर इस स्थान को वन विभाग उपयुक्त मान रहा है. हालांकि सरकार से निर्माण स्थल की अनुमति मिलने के बाद ही इस पर मुहर लग पायेगी.
घायल होने पर सेंटर पर लाये जायेंगे मगरमच्छ:
कई बार किसी कारणवश मगरमच्छ के घायल हो जाने की स्थिति में उसकी देखभाल में दिक्कत हो जाती है. कई बार मगरमच्छ को नदी के किनारे आ जाने या किसी गांव में घुस जाने से लोग भय के कारण उसे मार देते हैं. ऐसे वक्त में मगरमच्छों को राहत देने के लिये इस केंद्र का निर्माण किया जा रहा है. यहां मगरमच्छ को लाया जायेगा और उसका इलाज कर पुन: उसे उसी नदी में छोड़ दिया जायेगा, जहां से उसे सेंटर में लाया गया होगा.
कछुआ अस्पताल का निर्माण अंतिम चरण में:
सुंदरवन में कछुआ के लिए रेस्क्यू एंड रीहेबिलिटेशन सेंटर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है. यह निर्माण भारत सरकार व बिहार सरकार की ओर से किया जा रहा है. यह बिहार का पहला व इकलौता सेंटर होगा. भारत सरकार की तरफ से भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून के विशेषज्ञ सेंटर के निर्माण की देख-रेख कर रहे हैं. वन प्रमंडल पदाधिकारी एस सुधाकर ने बताया कि तीन माह में कछुआ रेस्क्यू सेंटर बन कर तैयार हो जायेगा.
अप्रैल 2018
खरीक के लोकमानपुर में कोसी नदी में मृत अवस्था में एक बड़े आकार का मगरमच्छ मिला था. वन अधिकारियों ने नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में इसका पोस्टमार्टम कराया था. आशंका जतायी गयी थी कि किसी शिकारी ने इसे मार डाला होगा.
सितंबर 2018
कटिहार के बकिया सुखाय पंचायत के दुर्गास्थान टोला में किनारे में एक मगरमच्छ फंस गया था. उसे ग्रामीणों ने गंगा नदी में छोड़ा था. बाढ़ के समय इस इलाके में अक्सर मगरमच्छ देखे जाते हैं.
अगस्त 2016
श्रावणी मेला के दौरान सुलतानगंज गंगा घाट पर मगरमच्छ मिला था. बड़ी मुश्किल से ग्रामीणों के सहयोग से पकड़ा गया. फिर वन विभाग के कर्मी के सुपुर्द किया गया था.