सृजन घोटाला : भागलपुर की पूर्व एडीएम जयश्री ठाकुर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल

पटना : सीबीआइ ने सोमवार को सृजन घोटाले की आरोपित जयश्री ठाकुर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया. भागलपुर की पूर्व एडीएम और बिहार प्रशासनिक सेवा की अफसर रही जयश्री ठाकुर के खिलाफ सीबीआइ के मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार सिंह की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया. इसके बाद उनके खिलाफ ट्रायल चलाने के लिए आरोपपत्र […]

पटना : सीबीआइ ने सोमवार को सृजन घोटाले की आरोपित जयश्री ठाकुर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया. भागलपुर की पूर्व एडीएम और बिहार प्रशासनिक सेवा की अफसर रही जयश्री ठाकुर के खिलाफ सीबीआइ के मजिस्ट्रेट प्रवीण कुमार सिंह की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया.

इसके बाद उनके खिलाफ ट्रायल चलाने के लिए आरोपपत्र और अन्य दस्तावेजों को सीबीआइ के दूसरे विशेष जज अजय कुमार श्रीवास्तव के यहां भेज दिया गया. इसके पूर्व सीबीआइ सृजन घोटाले से संबंधित सात मामलों में आरोपपत्र दायर कर चुकी है.

जयश्री ठाकुर के अलावा 15 अभियुक्तों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ है. सभी आरोपित जेल में बंद हैं और उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है. सीबीआइ ने अब तक सात मामलों में आरोपपत्र दायर किया है. कुल 12 प्राथमिकियां अब तक सृजन घोटाले में दर्ज की गयी हैं. इसी मामले में जयश्री ठाकुर को सीबीआइ ने 28 जनवरी को गिरफ्तार किया, तब से जेल में वह बंद हैं.

इओयू ने भी दर्ज किया था आय से अधिक संपत्ति का मामला

जयश्री ठाकुर पर राज्य की आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने भी आय से अधिक संपत्ति और पद का दुरुपयोग करने के मामले में वर्ष 2013 में दो केस दर्ज किये थे. इस मामले में उनके घर पर छापेमारी भी हो चुकी है और अवैध संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज भी बरामद किये गये थे.

इस मामले में भी वह जेल भी जा चुकी हैं. जब वह बांका में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी और भागलपुर में एडीएम थीं, तो अवैध रूप से काफी संपत्ति जमा की थी. निगरानी ने 11 जुलाई, 2013 में दो करोड़ 27 लाख 76 हजार 766 रुपये आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था. अनुसंधान के क्रम में निगरानी की जांच टीम ने पाया था कि जयश्री ठाकुर अपने परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से अकूत संपत्ति अर्जित की.

जयश्री ठाकुर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी बांका व अपर समाहर्ता भागलपुर ने अपने पद पर रहते हुए भागलपुर, पटना व बांका में परिजनों के नाम 18 प्लॉट, बीमा क्षेत्र में 33 निवेश, 15 बांड और विभिन्न बैंकों में 76 खाते रखे हुए हैं. बैंक खातों में करोड़ों रुपयों का लेन-देन पाया गया था.

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