भागलपुर: जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चिकित्सा अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में डोनर की रिपोर्ट पर चिकित्सक हस्ताक्षर नहीं करते हैं. डोनर के ब्लड की जांच वहां मौजूद टेक्नीशियन करते हैं. रिपोर्ट के आधार पर ही मरीज का रक्त लिया जाता है. यह स्थिति तब है जब मेडिकल कॉलेज में बायो केमेस्ट्री, पैथोलॉजी सहित अन्य विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद हैं.
जबकि यही जांच अगर बाहर के पैथोलॉजी में टेक्नीशियन करते हैं, तो उसे विभाग गलत ठहरा रहा है. उदाहरण के तौर पर आदमपुर के आशीष आनंद ने मई में रक्तदान किया, लेकिन टेक्नीशियन ने जांच के बाद कहा कि उसे हेपेटाइटिस बी की संभावना है.
वह चाहे तो किसी प्राइवेट सेंटर में अपनी जांच करा कर संतुष्ट हो सकता है. वह काफी घबरा गया. उसने तिलकामांझी स्थित विमटा लैब में जांच करायी, तो वहां की रिपोर्ट में ऐसी बात नहीं मिली. ब्लड विभाग के कर्मियों के अनुसार डोनरों की जांच रिपोर्ट डोनर को नहीं दी जाती है. ब्लड बैंक के गाइड लाइन के अनुसार रिपोर्ट किसी को नहीं दिया जा सकता है. अधीक्षक डॉ आरसी मंडल का कहना है कि डोनर के ग्रुप के साथ बीमारी की जांच मशीन से की जाती है. इसके लिए टेक्नीशियन को प्रशिक्षण दिया गया है, चूंकि पूरी तरह से पैथोलॉजी जांच वहां नहीं होती है, इसलिए चिकित्सक जांच नहीं करते हैं. इसके लिए पैथोलॉजी विभाग है, वहां पैथोलॉजिस्ट जांच रिपोर्ट देखते हैं.
