जाम से ट्रक मालिकों को हर माह 37.5 करोड़ का हो रहा है नुकसान

भागलपुर : जीरोमाइल-मिर्जाचौकी रोड में अगर जाम नहीं लगे तो मिर्जाचौकी-बड़हरवा और जीरोमाइल के बीच रोजाना 5 हजार से अधिक ट्रकों की आवाजाही होगी. जाम के कारण इससे आधी संख्या में ट्रकें मिर्जाचौकी से भागलपुर के बीच 60 किलोमीटर की दूरी में खड़ी रहती हैं. तीन घंटे की दूसरी चार से पांच दिन में पूरी […]

भागलपुर : जीरोमाइल-मिर्जाचौकी रोड में अगर जाम नहीं लगे तो मिर्जाचौकी-बड़हरवा और जीरोमाइल के बीच रोजाना 5 हजार से अधिक ट्रकों की आवाजाही होगी. जाम के कारण इससे आधी संख्या में ट्रकें मिर्जाचौकी से भागलपुर के बीच 60 किलोमीटर की दूरी में खड़ी रहती हैं. तीन घंटे की दूसरी चार से पांच दिन में पूरी करने के कारण एक ट्रक पर डीजल और ड्राइवर के खानपान पर 5 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च हो जाता है.
मिर्जाचौकी से गिट्टी लोड कर ढाई हजार ट्रकें भागलपुर की ओर निकलती हैं. प्रति ट्रक पर पांच हजार रुपये के नुकसान को ढ़ाई हजार ट्रकों से गुणा करे तो रोजाना 1.25 करोड़ का नुकसान का आकलन हो रहा है. महीने भर में इस रूट में चलने वाली ट्रकों को 37.5 करोड़ डूब रहे हैं. इतने खर्च पर छह माह में एक एक्सप्रेस वे का निर्माण हो जाता. जाम के दौरान करीब 35 किलोमीटर लंबी ट्रकों की कतार लगती है. ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मिर्जाचौकी से गिट्टी लदे ट्रक भागलपुर पहुंचने में 50 लीटर डीजल खर्च करता है.
जाम के दौरान ट्रकें चार से पांच दिन में 60 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं. डीजल की खपत 90 लीटर तक पहुंच जाती है. डीजल की कीमत 74 रु प्रति लीटर है. ऐसे में एक ट्रक को सिर्फ डीजल पर 3 हजार रुपये अतिरिक्त खर्च होता है. ड्राइवर और खलासी जाम के दौरान 1500 रुपए खाने पीने पर अतिरिक्त खर्च करते हैं. ऐसे में जाम के दौरान एक ट्रक को पांच हजार रुपए तक का नुकसान हो जाता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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