नहीं हो रहा सुधार, क्यों नहीं आपके अस्पताल को बंद कर दिया जाये

भागलपुर : बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के 20 जिलों की 149 स्वास्थ्य इकाई को नोटिस जारी किया है. बोर्ड ने स्वास्थ्य इकाई से बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण नहीं किये जाने पर प्रोपोज्ड क्लोजर डायरेक्शन (संस्थान को बंद करने से पहले की जानेवाली कारणपृच्छा) जारी कर पूछा है कि क्यों नहीं उनके अस्पताल […]

भागलपुर : बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के 20 जिलों की 149 स्वास्थ्य इकाई को नोटिस जारी किया है. बोर्ड ने स्वास्थ्य इकाई से बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण नहीं किये जाने पर प्रोपोज्ड क्लोजर डायरेक्शन (संस्थान को बंद करने से पहले की जानेवाली कारणपृच्छा) जारी कर पूछा है कि क्यों नहीं उनके अस्पताल को बंद करा दिया जाये. इस पर अस्पताल प्रबंधन से अपना-अपना पक्ष रखने के लिए कहा है.
इस क्रम में पूर्व बिहार-कोसी के छह जिले शामिल हैं. बोर्ड ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि बोर्ड के लगातार प्रयास के बाद भी बायोमेडिकल कचरा व खराब हो चुकी दवाइयों के निपटान के प्रति स्वास्थ्य केंद्रों के संचालक गंभीर नहीं हो रहे हैं. अधिकतर अस्पतालों ने नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप बायोमेडिकल कचरे के उपचार के लिए इटीपी की स्थापना नहीं की है और इसके लिए जल अधिनियम 1974 के अंतर्गत बोर्ड से सहमति भी नहीं ली है. ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध बोर्ड ने कठोर कदम उठाने की बात कही है.
प्रभात खबर ने लगातार प्रकाशित की थी खबर, किया था आगाह
अधिकतर अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, पैथोलॉजी द्वारा बायोमेडिकल कचरा के निपटान नहीं कराये जाने और इसके लिए सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट से अनुबंध नहीं कराने की खबर प्रभात खबर ने जून माह में लगातार प्रकाशित की. इस पर भागलपुर के प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने गत 12 जून को बैठक बुलायी और तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. आइएमए के भागलपुर अध्यक्ष डॉ एसपी सिंह ने कहा था कि एक सप्ताह में अनुबंध करा दिया जायेगा. इसके बाद कुछ अस्पतालों का अनुबंध हुआ भी.
भागलपुर के इन अस्पतालों को नोटिस
1. आश्रय नर्सिंग होम
2. सुशीला हॉस्पिटल
3. पल्स हॉस्पिटल
4. खेश्वर ऑर्थोपीडिक हॉस्पिटल एंड ऑर्थोंसियोपिक सेंटर
5. आस्था नर्सिंग होम एंड मेटरनिटी सेंटर
6. सूर्या क्लिनिक
7. एडवांस मेटरनिटी एंड इंफर्टिलिटी सेंटर
8. डॉ मसीह आजम क्लिनिक
9. संत शारोला नर्सिंग होम
10. ऑर्थोपीडिक डिजीज एंड ट्रॉमा केयर सेंटर
11. जेपी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल
12. एडवांस ट्रॉमा एंड माइक्रो सर्जरी सेंटर
13. होली फैमिली हेल्थ सेंटर

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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