भागलपुर : सृजन घोटाले में सीबीआई ने दर्ज कीं 4 प्राथमिकियां, पूर्व भू-अर्जन पदाधिकारी जयश्री समेत 22 अभियुक्त

रांची/भागलपुर : बिहार (भागलपुर) के चर्चित सृजन घोटाले में सीबीआई दिल्ली ने चार प्राथमिकियां दर्ज की हैं. इनमें बांका के तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार, भू-अर्जन पदाधिकारी जयश्री ठाकुर, भागलपुर के बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के अधिकारियों समेत 22 को अभियुक्त बनाया गया है. इन सभी पर सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी […]

रांची/भागलपुर : बिहार (भागलपुर) के चर्चित सृजन घोटाले में सीबीआई दिल्ली ने चार प्राथमिकियां दर्ज की हैं. इनमें बांका के तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार, भू-अर्जन पदाधिकारी जयश्री ठाकुर, भागलपुर के बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के अधिकारियों समेत 22 को अभियुक्त बनाया गया है. इन सभी पर सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी कागजात के सहारे सरकारी राशि हड़पने का आरोप लगाया गया है.
सीबीआई दिल्ली ने सृजन घोटाले के सिलसिले मेें जिला प्रशासन की ओर से वर्ष 2017 में दर्ज करायी गयी चार प्राथमिकियों को ही आधार बनाया है.
बांका थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 505/17 के आधार पर सीबीआई ने पहली प्राथमिकी दर्ज की है. इसमें कुल तत्कालीन जिला भू अर्जन पदाधिकारी जयश्री ठाकुर, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक के तत्कालीन मैनेजर के साथ ही सृजन के सभी पदाधिकारियों को अभियुक्त बनाया है. सीबीआई ने दूसरी प्राथमिकी सबौर थाने में प्रशासन की ओर से दर्ज करायी गयी प्राथमिकी ( 241/17) को आधार बनाया है. इसमें शुभ लक्ष्मी, रजनी प्रिया, सीमा देवी, जसीमा खातून, रजनी वर्मा, अर्पणा वर्मा, रूबी कुमारी, रानी देवी, सुनीता देवी और सुना देवी को अभियुक्त बनाया है. तीसरी प्राथमिकी भागलपुर कोतवाली थाने में दर्ज करायी गयी प्राथमिक 545/17 को आधार बनाया है. इसमें बैंक ऑफ बड़ौदा घंटा घर और इंडियन बैंक पटेल बाबू रोड के तत्कालीन मैनेजर को अभियुक्त बनाया है.
चौथी प्राथमिकी भागलपुर कोतवाली थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 554/17 के आधार पर की गयी है. इसमें बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर व कैशियर, जिला कल्याण पदाधिकारी अरुण कुमार, तत्कालीन नाजिर महेश मंडल (दिवंगत) के साथ ही सृजन महिला विकास सहयोग समिति के अकाउंटेंट व मैनेजर को अभियुक्त बनाया है. पहली व दूसरी प्राथमिकी की जांच जिम्मेवादी इंस्पेक्टर जोगिंदर सिंह को सौंपी गयी है. तीसरी और चौथी प्राथमिकी की जांच की जिम्मेदारी डीएसपी एसके भट्ट को सौंपी गयी है.
मालूम हो कि भागलपुर, बांका व सहरसा के विभिन्न थानों में स्थानीय प्रशासन की ओर से अब तक सृजन मामले में 26 प्राथमिकियां दर्ज हो चुकी हैं. 14 मामलों की वर्ष 2017 से ही सीबीआई स्थानीय प्रशासन द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मामला दाखिल करने के बाद से जांच कर रही है.
अब चार और नये मामले की भी जांच शुरू हो गयी है. यानी कुल 18 मामलों की सीबीआई पड़ताल कर रही है. मालूम हो कि सबौर स्थित बीएयू परिसर में सीबीआई का अगस्त 2017 से कैंप कार्यालय चल रहा है, जहां से अनुसंधान हो रहा है. इसकी मॉनीटरिंग पटना-दिल्ली कार्यालय की ओर से की जा रही है.
साजिशन फर्जी कागजात के सहारे सरकारी राशि हड़पने का आरोप
तीन एफआईआर में आरोप
बांका भू-अर्जन विभाग के खाते से 83.10 करोड़ का गबन
80,81,438 रुपये का बैंक ड्राफ्ट भागलपुर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के खाते में जमा नहीं हुआ, जबकि अज्ञात स्रोतों से 81,45,232 रुपये अवैध प्राप्त हाे गये
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के बैंक खाते में 115 करोड़ 71 लाख 61 हजार 287 रुपये जमा
नहीं हुए
अिभयुक्तों में सृजन की सचिव रजनी प्रिया भी शामिल
जयश्री ठाकुर, तत्कालीन जिला
भू अर्जन पदाधिकारी
अरुण कुमार, तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी
स्व महेश मंडल, तत्कालीन नाजिर
मैनेजर सृजन समिति
एकाउंटेंट सृजन महिला समिति
सृजन महिला समिति के सभी पदाधिकारी व अन्य अज्ञात
तत्कालीन मैनेजर बैंक ऑफ बड़ौदा
तत्कालीन मैनेजर बैंक ऑफ बड़ौदा, घंटाघर
तत्कालीन कैशियर बैंक ऑफ बड़ौदा
तत्कालीन मैनेजर इंडियन बैंक
विनोदानंद प्रसाद की पत्नी
शुभ लक्ष्मी
अमित की सचिव पत्नी रजनी प्रिया
प्रणय कुमार की पत्नी सीमा देवी
शकील अहमद की पत्नी जसीमा खातून
समर समरेंद्र की पत्नी रजनी वर्मा
अभिषेक वर्मा की पत्नी अर्पणा वर्मा
बिपिन वर्मा की पत्नी रूबी कुमारी
रवि पासवान की पत्नी रानी देवी
बबलू हरिजन की पत्नी सुनीता देवी
जगदीश तांती की पत्नी सुना देवी

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bhagalpur news. प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे व साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो - लोकभवन ने विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने दिया निर्देश- लोकभवन ने पत्र में कहा, निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायेवरीय संवाददाता, भागलपुरपीजी व कॉलेज में प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना है कि साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो. इसे लेकर लोकभवन के विशेष कार्य अधिकारी न्यायिक कल्पना श्रीवास्तव ने टीएमबीयू सहित सूबे के अन्य विश्वविद्यालयों में पत्र भेजा है. पत्र में विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए कार्यभार मानदंड सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है. विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार को लेकर सचिवालय ने विवि प्रशासन को सख्त रुख अपनाने के लिए कहा है. शिक्षकों के कार्यभार को लेकर जारी निर्देश में स्पष्ट कहा कि निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन करायी जाये.लोकभवन से जारी पत्र में कहा कि पूर्णकालिक कार्यरत सभी शिक्षकों को सेमेस्टर के दौरान प्रतिदिन कम से कम पांच घंटे तक कक्षाओं में उपस्थित रहना अनिवार्य है. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका साप्ताहिक कार्यभार 40 घंटे से कम न हो.शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह लागू रहेगापत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि न्यूनतम कार्यभार एक शैक्षणिक वर्ष में कम से कम 30 सप्ताह यानी 180 कार्य दिवसों तक लागू रहेगा. साप्ताहिक 40 घंटे के कार्यभार को छह कार्य दिवसों में समान रूप से विभाजित करने का निर्देश दिया है. कहा कि यूजीसी के प्रावधानों में भी कार्यभार से संबंधित इसी तरह के मानदंड निर्धारित हैं. जिन्हें कानूनी मान्यता प्राप्त है. उनका पालन अनिवार्य है. उन मानकों को सख्ती से लागू कर बेहतर शैक्षणिक परिणाम सुनिश्चित करें.लोकभवन को मिली शिक्षकों के गायब रहने की शिकायतलोकभवन को शिक्षकों के गायब रहने की शिकायत मिल रही है. अंदरखाने की मानें, तो कुछ छात्र संगठन व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कॉलेज व पीजी विभागों में निर्धारित समय से पहले ही गायब रहने की शिकायत लोकभवन से की है. इसे लेकर कुलाधिपति सख्त होते दिख रहे है. ऐसे में कॉलेजों व पीजी विभाग का औचक निरीक्षण भी किया जा सकता है.ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी की नहीं होती है क्लासकॉलेज में ऑनर्स विषय छोड़ सब्सिडियरी विषय की क्लास नहीं होती है. एक दिन पहले छात्र राजद के कार्यकर्ताओं ने एक कॉलेज के प्राचार्य से वार्ता के दौरान कहा था कि एमजेसी (ऑनर्स) विषय की क्लास होती है, लेकिन एमआइसी (सब्सिडियरी) विषय की क्लास नहीं होती है. छात्र संगठन का आरोप था कि एईसी, वीएसी व एसीसी की भी क्लास भी नहीं होती है.लोकभवन के निर्देश का हो रहा पालन - शिक्षक संगठनशिक्षक संगठन भुस्टा के महासचिव प्रो जगधर मंडल ले कहा कि लोकभवन के निर्देश का पालन हो रहा है. यूजीसी के नियमानुसार कॉलेज व पीजी विभागों में पांच घंटे तक शिक्षकों रहते हैं. सारा कार्य करते हैं. यह कोई नई बात नहीं है. शिक्षक लोकभवन के साथ है.

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