Bettiah Waterlogging News: नगर निगम क्षेत्र में हुई कुछ घंटों की बारिश ने एक बार फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आशा नगर, पक्की फुलवारी, उतरवारी पोखरा, बसवरिया, इमली चौक, नौतन रोड, राज देवड़ी, नजरबाग पार्क और लाल बाजार रोड समेत कई इलाकों में जलजमाव से लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के मौसम में यही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है.
आशा नगर सबसे अधिक प्रभावित
नगर निगम क्षेत्र का आशा नगर इलाका सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है. यहां बड़ी संख्या में ऐसे परिवार रहते हैं, जो बच्चों की पढ़ाई के लिए किराये के मकानों में रह रहे हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार, जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सामान्य दिनों में भी नाले का पानी सड़कों पर जमा रहता है. बारिश के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है.
नई सड़क बनी, लेकिन जलनिकासी नहीं
सोआ बाबू चौक के पास बनी नई सड़क का स्तर ऊंचा होने और नाला नहीं बनने से लाल बाजार रोड की ओर जलजमाव की समस्या बढ़ गई है.
स्थिति यह है कि नगर निगम को बार-बार सक्शन मशीन से पानी निकालना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी हो रहा है.
स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी
जलभराव का सबसे अधिक असर स्कूल जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है.
सेंट जेवियर्स स्कूल के गेट के पास जमा पानी में कई बच्चे साइकिल समेत गिर चुके हैं. बाइक और ई-रिक्शा से आने वाले विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी हर दिन दुर्घटना का डर बना रहता है.
स्कूलों के सामने भी बदहाल सड़कें
आशा नगर मार्ग से सेंट जेवियर्स स्कूल, केआर स्कूल, एजी चर्च स्कूल और नोट्रे डेम पब्लिक स्कूल जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं प्रतिदिन गुजरते हैं.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन स्कूलों में प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों के बच्चे भी पढ़ते हैं, लेकिन सड़क और जलनिकासी की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आती.
खबर का असर: जीएमसीएच गेट से निकला पानी
इधर, जीएमसीएच के मुख्य द्वार पर जलजमाव की समस्या पर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है.
जिला प्रशासन और नगर निगम के निर्देश पर निर्माण एजेंसी ने वहां वैकल्पिक नाला तैयार कराया. सोमवार सुबह तक अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने जमा पानी निकल गया, जिससे मरीजों और परिजनों को कुछ राहत मिली.
हालांकि शहर के अन्य जलजमाव वाले इलाकों में लोग अब भी स्थायी समाधान का इंतजार कर रहे हैं.
