West Champaran News: चंपारण आदिवासी उरांव महासभा के तत्वावधान में रविवार शाम मैनाटांड़ प्रखंड के चक्रसन गांव में विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मनाया गया. कार्यक्रम में मैनाटांड़ और गौनाहा प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हुए. कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज के इतिहास, अधिकार, संस्कृति और सामाजिक एकता को लेकर चर्चा की गई.
विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज के अधिकारों पर चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता चक्रसन नवयुवक संघ के अध्यक्ष आकाश उरांव ने की. संरक्षक आशीष उरांव और कोषाध्यक्ष लाल बहादुर उरांव मौजूद रहे. मुख्य अतिथि के रूप में बलिराम उरांव और शंकर उरांव शामिल हुए.
इस दौरान विश्व आदिवासी दिवस के इतिहास और महत्व के साथ आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों तथा सामाजिक एकता और जागरूकता पर विचार-विमर्श किया गया.
संवैधानिक अधिकारों और एकजुटता पर दिया जोर
मुख्य अतिथि शंकर उरांव ने आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों और एकजुटता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि समाज को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहते हुए एकजुट होकर आगे बढ़ने की जरूरत है.
बलिराम उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज को अपनी संस्कृति, पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करना चाहिए.
प्रशासनिक भेदभाव और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की अपील
आशीष उरांव ने प्रशासनिक भेदभाव को समाप्त करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि समाज के हितों की रक्षा के लिए लोगों को जागरूक होकर अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए.
शिक्षा और जागरूकता को बताया विकास का हथियार
चक्रसन नवयुवक संघ के अध्यक्ष आकाश उरांव ने कहा कि शिक्षा और जागरूकता आदिवासी समाज के विकास का सबसे महत्वपूर्ण हथियार है. उन्होंने युवाओं और बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक होने तथा समाज को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की.
जय जोहार के नारों से गूंजा कार्यक्रम स्थल
कार्यक्रम के दौरान लोगों ने "जय जोहार, जय आदिवासी" और "एक तीर, एक कमान, सभी आदिवासी एक समान" के नारे लगाए. ग्रामीणों ने जल-जंगल-जमीन, संस्कृति, पहचान और आदिवासी अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया.
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
कार्यक्रम में जोगिंदर उरांव, सरल उरांव, अंकित उरांव, बिछिया देवी, सीता देवी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया.
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