एक तरफ गोद में महिला मरीज, तो दूसरी तरफ जमीन पर प्रसव

राज्यवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले साथ ही भविष्य के लिए डॉक्टरों की नई पौध भी तैयार हो, इसके लिए राज्य में जोर-जोर से मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है.

बेतिया. राज्यवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले साथ ही भविष्य के लिए डॉक्टरों की नई पौध भी तैयार हो, इसके लिए राज्य में जोर-जोर से मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है. लेकिन मानव संसाधन और विभिन्न अन्य आवश्यक जरूरतों की कमी के कारण मरीजों को उचित सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं. जिला मुख्यालय स्थित जीएमसीएच में भी दूर दराज से मरीज इलाज कराने आते है. दुर्घंटनाग्रस्त तथा गंभीर मरीजों को चिकित्सक के पास ले जाने के लिए मरीज के परिजन स्ट्रेचर के लिए चारों तरफ दौड़ लगाते है. काफी मुश्किल से उन्हें स्ट्रेचर मिल पाता है. सोमवार को स्ट्रैचर से जुड़ी कुछ समस्या देखने को मिली. रामनगर से तीसरा प्रसव कराने आई संतोष चौधरी की पत्नी संजू देवी (32) का प्रसव स्ट्रेचर के अभाव में जीएमसीएच के कंट्रोल रूम से कुछ दूरी पर बी ब्लॉक जाने वाले गलियारे में फर्श पर ही हो गया. उसके साथ आई अन्य महिलाओं ने पर्दा डालकर प्रसव कराया. रामनगर बरगजवा निवासी संजू के पिता नंदलाल चौधरी ने बताया की लगभग बारह बजे जीएमसीएच पहुंच गए थे. संजू को प्रसव पीड़ा अधिक होने के कारण प्रसव वार्ड तक पैदल जाने मे असमर्थ थी. उन लोगों ने संजू को वही फर्श पर साथ आई महिलाओ के पास लिटा कर स्ट्रेचर खोजने लगें. लगभग आधे घंटे तक स्ट्रेचर खोजते रहे, लेकिन नही मिला. उधर अत्यधिक प्रसव पीड़ा होने के कारण फर्श पर ही बच्चे को जन्म दे दिया. उसके साथ आई अन्य महिलाओं ने स्वास्थ्य कर्मियों व ममता कार्यकर्ताओं के सहयोग से साडी का पर्दा डालकर सुरक्षित प्रसव कराया. इसकी जानकारी होते ही कंट्रोल रूम के कर्मियों मे बेचैनी हो गई. आनन फानन में स्ट्रेचर को उपलब्ध कराकर मरीज को प्रसव वार्ड मे भेजवाया. अभी वह प्रसूता वार्ड में गई भी नही थी, तब तक कैजुअल्टी वार्ड से सी ब्लॉक के दूसरे तल्ले पर शिफ्ट की गई एक महिला मरीज को स्ट्रेचर नही मिलने के कारण मरीज का पुत्र अपनी मां को गोद में ही उठा कर ले जा रहा था. मझौलिया के भोगाडी निवासी शैरुन नेशा (55) को सीने मे दर्द व सांस लेने की दिक्कत होने पर सोमवार को उनके पुत्र अली अख्तर जीएमसीएच के इमरजेंसी मे भर्ती कराये थे. वहां इलाज होने के बाद मरीज को वार्ड में भेजा गया. परिजन शैरुन नेशा को वार्ड मे ले जाने के लिए स्ट्रेचर खोजते रहे, लेकिन स्ट्रेचर नही मिला. स्ट्रेचर नहीं मिलने के कारण पुत्र अली अख्तर ने अपनी बुढ़ी मां को गोद मे उठा कर ले जाते हुए दिखें. उन्होंने बताया कि इतना बड़ा अस्पताल होने के बावजूद स्ट्रैचर नही मिला.

– क्या बोले अस्पताल प्रबंधक

अस्पताल प्रबंधक मो. शाहनवाज ने बताया कि कैजुअल्टी में शिफ्टवार स्ट्रेचर के लिए दो कर्मियों को रखा गया है. अभी फिलहाल बहुत से विभाग को सी ब्लॉक से बी ब्लॉक में शिफ्ट किया जा रहा है. उनके सामानों, उपकरणों को ले जाने के लिए भी कर्मियों को लगाया गया है. कार्यों में लगाये जाने के पूर्व कर्मियों द्वारा स्ट्रैचर को इमरजेंसी के पास रखवा दिया जाता है. स्ट्रेचर की परेशानी मरीज के परिजनों द्वारा भी उत्पन्न की जाती है. परिजन मरीज को स्ट्रैचर से ले जाते है और अपना कार्य हो जाने के पश्चात उसे इधर उधर छोड़ देते है. मैनपावर की कमी के कारण भी समस्या उत्पन्न हो रही है. इस संबंध में विभाग को अवगत करा दिया गया है. जल्द ही कोई हल निकलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: SATISH KUMAR

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >