बेतिया. शहर के वार्ड 25 में स्थित स्टेशन चौक पोखरा का अतिक्रमण हटाये बेगैर अतिक्रमित भूमि पर सड़क निर्माण के लिए 14.92 लाख रूपये की स्वीकृति नगर निगम ने दे दी है. जबकि पोखरा का आधा से अधिक रकवा अतिक्रमण की चपेट में हैं. तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ निलेश देवरे के कार्यकाल में पोखरे की कराई गई मापी में करीब तीन दर्जन अतिक्रमणकारी मिले थे, जिनके खिलाफ अतिक्रमणवाद चलाकर अवैध कब्जा हटाने का निर्देश जारी किया गया था. हालांकि डीएम के तबादले के साथ ही नगर निगम ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया और अब उसी अतिक्रमित भूमि पर सड़क निर्माण के योजना को स्वीकृति दे दी है. वह भी तब, जब कि यह पोखरा जल जीवन हरियाली योजना में भी शामिल रहा है. योजना के मुताबिक इस पोखरा के अवैध कब्जे को हटाकर इसे पुर्नजीवित करने और सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव था. लेकिन नगर निगम ने इन सभी प्रस्तावित योजनाओं पर पानी फेरते हुए अवैध कब्जे पर ही सरकारी पैसे खर्च करने की स्वीकृति दे दी. इसका खुलासा होने के बाद अब नगर विकास विभाग के अवर सचिव राजेश्वर राज ने मामले में नगर आयुक्त विनोद कुमार सिंह से जांच कर रिपोर्ट तलब की है. नगर निगम कार्यालय में अवर सचिव का पत्र के प्राप्त होने की खबर पाकर पोखरा के संबंधित भूखंड पर दशकों से काबिज सैकड़ों अतिक्रमणकारियों में खलबली मच गई है. बता दें कि नगर के उज्जैन टोला के खेसरा 209 में स्थित उक्त तालाब के अलावे उसके चारों तट पर बने आट की जमीन पर भी सैकड़ों अतिक्रमणकारी दशकों से काबिज हैं. इसमें कई बहुमंजिली इमारत समेत तमाम मकान व दुकान शामिल हैं. हालांकि अतिक्रमित भूमि पर सड़क निर्माण के योजना की स्वीकृति की जानकारी मिलने पर नगर निगम बोर्ड ने भी इसे रद् कर दिया है. —————————— मेयर से लेकर मुख्यमंत्री तक हुई थी शिकायत नगर निगम क्षेत्र के वार्ड 25 में स्थित ऐतिहासिक स्टेशन चौक पोखरा के भूखंड पर सड़क बनाने के विरोध में महापौर से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक शिकायत की गई है. वार्ड 30 के कृष्णानगर निवासी शाहजहां ने पोखरा की जमीन पर पक्का सड़क निर्माण की 14.92 लाख से भी अधिक की योजना को अतिक्रमण का वैध स्वरूप देने का षडयंत्र करार दिया है. शिकायतकर्त्ता शाहजहां ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन हरियाली के बुनियादी शर्तों की अवमानना करार दिया है. इसके साथ ही स्टेशन चौक पोखरा वाली खेसरा 208 और 209 पर काबिज सैकड़ों अतिक्रमणकारियों से इस सार्वजनिक पोखरा की जमीन से मुक्त करते हुए मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ””””जल जीवन हरियाली”””” योजना के तहत पोखरा को पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया है. इनकी शिकायत पर अवर सचिव ने जांच के निर्देश दिये हैं.
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