डिप्रेशन में आई लड़की कर रही थी सुसाइड की कोशिश, परिवार ने ऐसे बचाई जिंदगी

Bihar News: बिहार के बेतिया में मानसिक तनाव (डिप्रेशन) से जूझ रही एक 17 वर्षीय लड़की ने आत्महत्या की कोशिश की. परिवार की सतर्कता ने उसकी जान बचा ली. फिलहाल किशोरी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है.

Bihar News: बिहार के बेतिया में कालीबाग थाना क्षेत्र के पुरानी गुदरी वार्ड नंबर 9 में एक लड़की ने आत्महत्या की कोशिश की. घर के अंदर फंदे से लटकी बेटी को देख परिजनों के होश उड़ गए, लेकिन उनकी तत्परता और आसपास के लोगों की मदद से समय रहते उसकी जान बचा ली गई.

कालीबाग के पुरानी गुदरी इलाके में स्वर्गीय परशुराम साह की बेटी दीपशिखा ने घर के भीतर फंदा लगा लिया. जैसे ही भाई-बहनों ने अपनी बहन को फंदे से लटकते देखा, घर में चीखें गूंजने लगीं. पूरा परिवार बिना एक पल गंवाए उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ा. स्थानीय लोगों की मदद से आनन-फानन में फंदा काटकर किशोरी को नीचे उतारा गया. हालांकि, तब तक उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी और वह बेसुध हो गई थी.

डॉक्टरों की टीम हाई अलर्ट पर

घटना के तुरंत बाद दीपशिखा को बेसुध हालत में बेतिया के जीएमसीएच अस्पताल ले जाया गया. फिलहाल किशोरी की स्थिति नाजुक बनी हुई है और उसे इमरजेंसी वार्ड में ऑब्जर्वेशन पर रखा गया है.

अस्पताल परिसर में दीपशिखा के चार भाइयों और तीन बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है. परिवार के सदस्यों को बस एक ही उम्मीद है कि उनकी बहन की सांसें एक बार फिर सामान्य हो जाएं.

पुलिस की जांच शुरू

दीपशिखा पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव के दौर से गुजर रही थी. पिता की मृत्यु के बाद से घर में वैसे ही उदासी का माहौल था, लेकिन दीपशिखा के मन में क्या चल रहा था, यह रहस्य अब भी बरकरार है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. क्या यह केवल डिप्रेशन का मामला है या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह छिपी है, पुलिस हर एंगल से मामले की गुत्थी सुलझाने में जुटी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर घर का कोई सदस्य अचानक गुमसुम रहने लगे या सामाजिक मेल-जोल कम कर दे, तो उसे अकेला न छोड़ें. बेतिया की यह घटना हमें याद दिलाती है कि समय पर की गई मदद किसी की जान बचा सकती है. पुलिस का कहना है कि किशोरी के होश में आने के बाद उसके बयान से ही सुसाइड की कोशिश की असली वजह साफ हो पाएगी. (इनपुट: सुनील कुमार सिंह)

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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