Bettiah News: महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकिनगर में रविवार को प्रकृति, कृषि शोध और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम देखने को मिला. असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और झारखंड से कृषि संबंधी शोध के लिए पहुंचे वैज्ञानिकों ने वाल्मीकि सभागार परिसर में नागेश्वर चंपा का पौधा लगाया. पौधारोपण के दौरान शोधार्थियों और कृषि वैज्ञानिकों में खासा उत्साह देखने को मिला.
Valmikinagar News: शोध यात्रा के दौरान वैज्ञानिकों ने किया पौधारोपण
कृषि वैज्ञानिकों ने स्थानीय कृषि वैज्ञानिक विनय सिंह और प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार से संपर्क कर वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक संपदा, कृषि संभावनाओं और स्थानीय उपलब्धियों की जानकारी ली. इसके बाद सभी वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों ने सामूहिक रूप से नागेश्वर चंपा का पौधा लगाया.
वैज्ञानिकों ने कहा कि शोध यात्रा के दौरान पौधारोपण उनके लिए यादगार अनुभव रहा. उन्होंने पौधे के संरक्षण और नियमित देखभाल पर भी जोर दिया.
उत्तर प्रदेश के वैज्ञानिक ने संरक्षण की अपील की
उत्तर प्रदेश से आए कृषि वैज्ञानिक बीके शुक्ला ने कहा कि वे वाल्मीकिनगर में अपनी एक याद छोड़कर जा रहे हैं. भविष्य में यहां लौटकर पौधे को विकसित होते देखना उनके लिए सुखद अनुभव होगा.
उन्होंने स्थानीय लोगों से पौधे की नियमित देखभाल और संरक्षण की अपील की. उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखकर उन्हें पेड़ बनने तक विकसित किया जाए.
प्राकृतिक सुंदरता ने मोहा वैज्ञानिकों का मन
हिमाचल प्रदेश से आए एमके अग्रवाल ने वाल्मीकिनगर की प्राकृतिक सुंदरता की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन वाल्मीकिनगर का प्राकृतिक वातावरण और हरियाली भी बेहद आकर्षक है.
उन्होंने कहा कि यहां की हरियाली और शांत वातावरण ने उन्हें काफी प्रभावित किया और यहां से लौटने का मन नहीं कर रहा है.
सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करने का संदेश
कार्यक्रम के दौरान प्रकृति प्रेमी मनोज कुमार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक किया. उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करने और इसके स्थान पर सूती कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करने की अपील की.
अतिथियों को भी कपड़े के थैले भेंट किए गए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त समाज का संदेश लोगों तक पहुंचाया जा सके.
मिठाई खिलाकर वैज्ञानिकों को दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम के अंत में कृषि वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को मिठाई खिलाई गई. स्थानीय लोगों ने वैज्ञानिकों के शोध कार्य और पर्यावरण संरक्षण की पहल की सराहना की. सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और शोध कार्यों की सफलता की कामना की.
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