नेपाल में ' हलचल ', गंडक में उफान और पश्चिम चंपारण में बेचैनी... आखिर क्यों हर बार पहाड़ों का पानी बन जाता है यहां की चिंता?

नेपाल में भारी बारिश और फ्लैश फ्लड का असर गंडक नदी के जलस्तर पर दिखने लगा है. वाल्मीकिनगर गंडक बैराज पर बढ़ते पानी के बीच निगरानी बढ़ा दी गई है. जानिए नेपाल की बारिश, गंडक के उफान और पश्चिम चंपारण में बाढ़ के खतरे के बीच क्या है पूरा कनेक्शन और इसका असर किन इलाकों पर पड़ता है.

Flood alert: नेपाल के पहाड़ों में जब बादल बरसते हैं तो उसकी गूंज कई सौ किलोमीटर दूर पश्चिम चंपारण तक सुनाई देती है. इस बार भी अगस्त के अंतिम सप्ताह में नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा तो पश्चिम चंपारण से लेकर उत्तर बिहार तक प्रशासन अलर्ट हो गया. वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोलने पड़े और 26 अगस्त की रात बैराज से करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया.

नेपाल में बारिश और यहां बढ़ता पानी

दरअसल, गंडक सिर्फ बिहार की नदी नहीं है. इसका ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में फैला है. नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश होने पर वहां की नदियों और जलधाराओं का पानी तेजी से नारायणी-गंडक नदी तंत्र में पहुंचता है. यही पानी आगे वाल्मीकिनगर बैराज तक आता है. नेपाल में हालिया फ्लैश फ्लड के बाद गंडक का जलस्तर बढ़ने की वजह भी यही अंतरराष्ट्रीय नदी तंत्र रहा.

बैराज बना 'पानी का कंट्रोल रूम'

वाल्मीकिनगर बैराज पश्चिम चंपारण के लिए सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है. नेपाल की ओर से पानी बढ़ने पर बैराज पर दबाव बढ़ता है और गेट खोलकर पानी को आगे छोड़ा जाता है. 26 अगस्त को सभी 36 गेट खोले गए थे. हालांकि अगले दिन पानी का प्रवाह घटने लगा और 28 अगस्त तक स्थिति में सुधार की सूचना मिली. यानी नेपाल में हुई बारिश का असर पश्चिम चंपारण में हमेशा सीधे 'बाढ़' के रूप में नहीं आता. पहले पहाड़ों में बारिश होती है, फिर जलधाराओं का बहाव बढ़ता है, नदी में पानी पहुंचता है, बैराज पर दबाव बनता है और उसके बाद निचले इलाकों में खतरा बढ़ता है.

1987 में भी दिखा था पहाड़ के पानी का असर

पश्चिम चंपारण के बाढ़ इतिहास में 1987 का साल बेहद महत्वपूर्ण है. उस वर्ष जुलाई के तीसरे और चौथे सप्ताह में गंडक के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश हुई थी. नदी का बहाव इतना तेज हुआ कि तटबंध और उसके स्पर पर गंभीर दबाव पड़ा. यानी नेपाल और गंडक का रिश्ता आज की कहानी नहीं है. दशकों से पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्र में होने वाली भारी बारिश पश्चिम चंपारण के मैदानी इलाकों के लिए खतरे की घंटी बनती रही है.

लेकिन हर बाढ़ के लिए नेपाल जिम्मेदार नहीं

टीपी वर्मा महाविद्यालय नरकटियागंज की भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ अपर्णा झा बताती हैं कि पश्चिम चंपारण की हर बाढ़ को केवल नेपाल से जोड़ना सही नहीं होगा. जिले में स्थानीय और उत्तर बिहार की बारिश, बूढ़ी गंडक जैसी नदियों का जलस्तर, तटबंधों की स्थिति, नदी में गाद और जलनिकासी भी बाढ़ की स्थिति को गंभीर बनाते हैं. सरकारी बाढ़ इतिहास में पश्चिम चंपारण में स्थानीय जलग्रहण क्षेत्र की भारी बारिश से फ्लैश फ्लड का उल्लेख भी मिलता है. 2021 में नेपाल के गंडक जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के बाद पश्चिम चंपारण के बगहा, बेतिया और नरकटियागंज जैसे इलाकों में भी बाढ़ का पानी पहुंचा था. कई जगहों पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया था.

इसलिए पश्चिम चंपारण की नजर हमेशा नेपाल पर

पश्चिम चंपारण के लिए नेपाल सिर्फ पड़ोसी देश नहीं, बल्कि गंडक के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यही कारण है कि नेपाल में भारी बारिश, फ्लैश फ्लड या भूस्खलन की खबर आते ही वाल्मीकिनगर बैराज, गंडक के जलस्तर और तटबंधों की निगरानी बढ़ा दी जाती है.

पश्चिम चंपारण और उत्तर बिहार में कब-कब आई बाढ़

1978 — बिहार में उच्च तीव्रता वाली बड़ी बाढ़ का वर्ष. 1987 — बिहार के सबसे गंभीर बाढ़ वर्षों में शामिल; गंडक क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित रहा. 1998 — उत्तर बिहार की कई नदियों में जुलाई की शुरुआत में अत्यधिक डिस्चार्ज से तटबंधों पर दबाव बढ़ा. 2004 — बेहद विनाशकारी बाढ़; सरकारी रिकॉर्ड में तटबंध टूटने और कई मौतों का उल्लेख है. 2007 — उत्तर बिहार में गंभीर बाढ़; पश्चिम चंपारण भी प्रमुख प्रभावित जिलों में था. 2008 — कुसहा, नेपाल में कोसी तटबंध टूटने से बिहार के कई जिलों में बड़ी त्रासदी; पश्चिम चंपारण में भी बाढ़ की स्थिति दर्ज हुई थी. 2012 — गंडक और बूढ़ी गंडक क्षेत्र में पानी बढ़ा; पश्चिम चंपारण में फ्लैश फ्लड और सिकटा रेलवे स्टेशन पर पानी चढ़ने की स्थिति बनी. 2017 – बहुत भीषण बाढ़. पश्चिम चंपारण समेत उत्तर बिहार के 19 जिले प्रभावित हुए; जिले में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए और मौतें भी हुईं. 2026 — नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद गंडक में उफान; वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 गेट खोले गए और डिस्चार्ज करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंचा.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >