नरकटियागंज में मौत बनकर खड़ी है 52 साल पुरानी पानी टंकी, कभी भी हो सकता है भीषण हादसा

नरकटियागंज के कृषि बाजार में बनी 52 साल पुरानी पानी टंकी अब मौत का सबब बन गई है. देखरेख के अभाव में जर्जर हालत में पहुंची यह टंकी कभी भी गिर सकती है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है. स्थानीय लोग दहशत में हैं और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

Narkatiaganj Water Tank: नगर के वार्ड संख्या 3 स्थित कृषि बाजार में बनी पानी टंकी आसपास के लोगों के लिए कभी भी मौत का सबब बन सकती है. सरकार द्वारा इस पानी टंकी का निर्माण वर्ष 1974 में कृषि उत्पादन बाजार समिति के गठन के दौरान कराया गया था. देखरेख के अभाव में अब इसकी स्थिति अत्यंत जर्जर हालत में पहुंच चुकी है. मौके पर स्थिति यह है कि टंकी का सिर्फ ढांचा भर खड़ा रह गया है, जो बेहद कमजोर हो चुका है. दो हजार गैलन की भारी क्षमता वाली यह पानी टंकी कृषि बाजार में बड़े और भारी वाहनों के आवागमन के दौरान होने वाले कंपन से हिलने लगती है.इसके कई हिस्से पहले ही टूटकर नीचे गिर चुके हैं.

बाजार समिति के विघटन के बाद बदहाल हुई टंकी, स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल

स्थानीय लोगों के अनुसार 31 जुलाई 2006 को कृषि उत्पादन बाजार समिति के विघटन के बाद इस परिसर और पानी टंकी की स्थिति और भी भयावह होती चली गयी. कृषि बाजार के बगल में बसे पूरे मोहल्ले को लोग पानी टंकी मोहल्ले के नाम से ही जानते हैं, लेकिन अब यही टंकी इस मोहल्ले के लिए सबसे बड़ा डर बन गई है. स्थानीय निवासी नरेश वर्मा, गोनु प्रसाद, अशोक कुमार, अनिल वर्मा, राजकुमार उपाध्याय, सुनीता देवी और ममता देवी का कहना है कि उन्हें रोजाना इसी जर्जर टंकी के बगल से गुजरना पड़ता है.हमेशा यह डर बना रहता है कि यह कब ताश के पत्तों की तरह ढह जाए. पूर्व में कई बार टंकी के छज्जे टूटकर राहगीरों पर गिर चुके हैं, जिससे लोग घायल भी हुए हैं.

अधिकारियों को कई बार दिया गया आवेदन, नहीं हुई कोई ठोस पहल

वार्ड संख्या 3 के पार्षद अजीत कुमार उर्फ श्याम पंडित ने बताया कि पानी टंकी के जर्जर होने और इससे पैदा हुए खतरे को लेकर कई बार लिखित रूप से एसडीएम और नगर कार्यपालक पदाधिकारी को अवगत कराया जा चुका है. प्रशासन को बार-बार ध्यान दिलाने के बाद भी अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल या सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाया गया है. पार्षद और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इस जर्जर ऊंचे ढांचे को ध्वस्त नहीं किया गया, तो यह कभी भी अचानक गिर जाएगा जिससे एक भीषण हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.


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लेखक के बारे में

By Satish kumar pand

सतीश कुमार पांडेय ने वर्ष 2000 में जी न्यूज से पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने चर्चित दस्यु सरगनाओं की रिपोर्टिंग की. बाद में आज और दैनिक जागरण में कार्य किया. वर्ष 2016 से वें प्रभात खबर में कार्यरत हैं. इन्हें क्राइम, प्रशासनिक, राजनीतिक, सामाजिक तथा खेती-किसानी से जुड़ी खबरों में विशेष रुचि रही है.

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