Bettiah News: नेपाल के त्रिशूली नदी क्षेत्र में भूस्खलन और अचानक जलप्रवाह बढ़ने की स्थिति के बीच बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा ने शनिवार सुबह बैरिया प्रखंड के गंडक तटवर्ती इलाकों का निरीक्षण किया. उन्होंने पूजहा और सिंगही गंडक घाट के साथ घोड़हिया स्थित गंडक कार्यालय के समीप पहुंचकर नदी के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया. इस दौरान अधिकारियों से बाढ़ से निपटने की तैयारियों की जानकारी ली गई.
पूजहा और सिंगही घाट पर नदी की स्थिति का लिया जायजा
मंत्री रत्नेश सादा ने पूजहा और सिंगही गंडक घाट पर पहुंचकर नदी के जलस्तर और जलप्रवाह की स्थिति देखी. उन्होंने अधिकारियों से संभावित जल वृद्धि और तटवर्ती क्षेत्रों में इसके प्रभाव को लेकर जानकारी ली.
मंत्री ने कहा कि फिलहाल गंडक नदी की स्थिति सामान्य है, लेकिन निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.
तटबंधों की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों की ली जानकारी
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने तटबंधों की स्थिति, संभावित जलस्तर वृद्धि और प्रशासन की तैयारियों की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों और कर्मियों को संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहने का निर्देश दिया.
उन्होंने कहा कि प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें नदी के जलस्तर और तटवर्ती इलाकों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
निचले इलाकों के लोगों से सतर्क रहने की अपील
मंत्री ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की कि जलस्तर बढ़ने या किसी आपात स्थिति की सूचना मिलने पर प्रशासन का सहयोग करें. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने में किसी तरह की देरी न करें.
गंडक नदी में नेपाल से आने वाले पानी के कारण हाल के दिनों में जलप्रवाह में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. ऐसे में तटवर्ती इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया.
तटबंधों के पक्कीकरण को लेकर मुख्यमंत्री से करेंगे बातचीत
मंत्री रत्नेश सादा ने कहा कि पूर्व में भेजे गए पत्रों और संबंधित तिथियों के आधार पर मुख्यमंत्री से बातचीत की जाएगी. उन्होंने गंडक तटबंधों के पक्कीकरण की दिशा में पहल करने की बात कही.
मंत्री के अनुसार तटबंधों को मजबूत करने से तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को संभावित बाढ़ के दौरान सुरक्षा मिल सकेगी.
अधिकारियों को पूरी तैयारी रखने का निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी रखें. उन्होंने नदी के जलस्तर, तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने पर जोर दिया.
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