प्यार, विरोध और दो मौतें: 7 जन्म साथ निभाने का वादा, महज 5 महीने में उजड़ गई जिंदगी, प्रेम विवाह का खौफनाक अंत

22 वर्षीय असलम हुसैन और रानी खातून ने प्रेम विवाह किया, लेकिन कुछ महीनों बाद यह रिश्ता एक ऐसी त्रासदी में बदल गया जिसने दो परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. पहले असलम की गला रेतकर हत्या, फिर पत्नी की संदिग्ध मौत.

Love Marriage Tragedy: "हम दोनों साथ जिएंगे..." शायद यही सपना लेकर 22 वर्षीय असलम हुसैन और रानी खातून ने प्रेम विवाह किया था. लेकिन महज कुछ महीनों बाद यह रिश्ता ऐसी त्रासदी में बदल गया, जिसने दो परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. पहले असलम की गला रेतकर हत्या कर दी गई. पांच दिन बाद उसकी पत्नी रानी खातून रेलवे ट्रैक के पास मृत मिली.

पुलिस ने असलम हत्याकांड में रानी के पिता और भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि रानी की मौत के कारणों की जांच अभी जारी है. यह मामला प्रेम विवाह को लेकर समाज में मौजूद अस्वीकार्यता और हिंसक सोच पर गंभीर सवाल खड़ा करता है.

प्रेम विवाह के बाद शुरू हुआ विवाद

गौनाहा निवासी असलम हुसैन और रानी खातून ने परिवारों की नाराजगी के बावजूद प्रेम विवाह किया था. विरोध के कारण दोनों मेहदियाबारी में असलम की नानी सैयदा खातून के घर रह रहे थे. 23 जुलाई की शाम मनुआपुल थाना क्षेत्र में सड़क किनारे असलम का शव मिला. उसका गला रेता गया था और शरीर पर चाकू के कई वार थे.

मृतक के पिता जाकिर हुसैन ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही बेटे को लगातार धमकियां मिल रही थीं. फरवरी में उसके साथ मारपीट कर हाथ भी तोड़ दिया गया था और केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था.

पुलिस जांच में क्या सामने आया?

पश्चिम चंपारण पुलिस ने एसएसपी कुमार गौतम के निर्देश पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया. पुलिस के अनुसार वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रानी खातून के पिता मौनीद्दीन खान और भाई शाहिद खान उर्फ धोनी को गिरफ्तार किया गया. उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त चाकू, खून से सने कपड़े और घटना में इस्तेमाल बाइक भी बरामद की गई.

हालांकि, पति की हत्या के पांच दिन बाद रानी खातून का शव बेतिया-नरकटियागंज रेलखंड पर रेलवे ट्रैक के पास मिला. पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही उसकी मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे.

'यह सिर्फ हत्या नहीं, सामाजिक सोच का भी सवाल'

विजय बहादुर सिंह, अधिवक्ता

बेतिया सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय बहादुर सिंह कहते हैं कि भारत में प्रेम विवाह पूरी तरह कानूनी है, लेकिन समाज के कई हिस्सों में आज भी इसे सहज स्वीकार नहीं किया जाता. कई बार परिवार इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ लेते हैं और विवाद हिंसा तक पहुंच जाता है.

प्रो. डॉ अभय कुमार, प्राचार्य आरएलएसवाई कॉलेज

राम लखन सिंह यादव महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. अभय कुमार का कहना है कि प्रेम विवाह में सबसे बड़ी चुनौती दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि दो परिवारों की स्वीकृति होती है. जब संवाद की जगह गुस्सा और प्रतिशोध ले लेते हैं, तब ऐसी घटनाएं जन्म लेती हैं.

डॉ अपर्णा ओझा, प्राध्यापिका, टीपी वर्मा महाविद्यालय नरकटियागंज

टीपी वर्मा महाविद्यालय, नरकटियागंज की प्रोफेसर डॉ. अपर्णा ओझा मानती हैं कि रिश्तों पर बातचीत बंद होने और अहंकार हावी होने से कई बार पारिवारिक विवाद अपराध का रूप ले लेते हैं, जिसका सबसे बड़ा नुकसान युवाओं को उठाना पड़ता है.

रिश्तों की सबसे बड़ी सीख

डॉ जगमोहन कुमार, सचिव, रेड क्रॉस

रेडक्रॉस के सचिव डॉ. जगमोहन कुमार कहते हैं कि दो बालिगों को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार है. लेकिन जब परिवार संवाद की जगह प्रतिशोध का रास्ता चुनते हैं, तब नतीजा सिर्फ मुकदमे नहीं होते, बल्कि टूटे हुए परिवार और खत्म हो चुकी जिंदगियां होती हैं. असलम और रानी की कहानी भी यही याद दिलाती है कि नफरत और हिंसा का अंत किसी की जीत में नहीं, बल्कि सभी के नुकसान में होता है.

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लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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