Valmikinagar News: महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि वाल्मीकिनगर के घने वन क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध जटाशंकर धाम मंदिर श्रावणी मेले के स्वागत के लिए पूरी तरह सजने लगा है. सावन मास के आगमन के साथ मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और पारंपरिक सजावट से संवारा जा रहा है. भगवान जटाशंकर महादेव का विशेष श्रृंगार, भव्य महाआरती और धार्मिक अनुष्ठान इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र होंगे.
बिहार, यूपी और नेपाल से पहुंचेंगे हजारों श्रद्धालु
श्रावणी मेले के दौरान बिहार, उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल से हजारों शिवभक्त जटाशंकर धाम पहुंचकर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगे. श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर मंदिर समिति तथा स्थानीय प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है.
स्थानीय कारोबारियों में भी उत्साह
श्रावणी मेले को लेकर स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों में भी उत्साह का माहौल है. हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलता है, जिससे यह मेला उनके रोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बनता है.
सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रावण मास भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. श्रद्धा से सोमवार का व्रत रखने और शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग तथा गंगाजल अर्पित करने से सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
17 अगस्त को बनेगा दुर्लभ महासंयोग
पंडित अनिरुद्ध द्विवेदी के अनुसार इस वर्ष 30 जुलाई को श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जो शिव उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. सावन की पहली सोमवारी 3 अगस्त, दूसरी 10 अगस्त, तीसरी 17 अगस्त और चौथी 24 अगस्त को पड़ेगी.
विशेष रूप से 17 अगस्त को सावन सोमवार, नाग पंचमी और सिंह संक्रांति का दुर्लभ महासंयोग बनने से इस दिन का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाएगा. आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य के अद्भुत संगम से सजा जटाशंकर धाम एक बार फिर श्रावणी मेले में हजारों श्रद्धालुओं की भक्ति का साक्षी बनने को तैयार है.
