West Champaran News: वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े गए पानी में कमी आने के बाद शुक्रवार को गंडक नदी का जलस्तर घटने लगा. नदी का जलस्तर फिलहाल 1 लाख 75 हजार क्यूसेक पर पहुंच गया है. जलस्तर में गिरावट से प्रशासन और तटवर्ती गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है. हालांकि जलभराव, कटाव और संपर्क मार्गों के जलमग्न रहने से ग्रामीणों की परेशानी अभी बनी हुई है.
Valmikinagar News: गंडक का जलस्तर घटने से मिली राहत
गंडक नदी का जलस्तर घटने के बाद फिलहाल बाढ़ का तत्काल खतरा टलता नजर आ रहा है. प्रशासन की ओर से लगातार नदी के जलस्तर और तटवर्ती क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी अभी आबादी के भीतर नहीं पहुंचा है, जिससे बड़ी राहत मिली है.
संपर्क मार्ग अब भी जलमग्न
नदी का पानी घटने के बावजूद तटवर्ती गांवों के कई संपर्क मार्ग अब भी पानी में डूबे हुए हैं. कई स्थानों पर सड़क पर पानी और कीचड़ जमा है. इससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर घटने के बाद भी आवागमन सामान्य होने में समय लग सकता है.
खेतों में जलभराव से खेती प्रभावित
जलभराव के कारण खेतों में खेती-किसानी का काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है. खेतों तक पहुंचना मुश्किल होने से किसान परेशान हैं. पानी जमा रहने के कारण कृषि कार्य बाधित हैं और ग्रामीणों को आने वाले दिनों में फसल को लेकर भी चिंता बनी हुई है.
पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट
बाढ़ और जलभराव का असर पशुपालकों पर भी पड़ा है. खेतों और आसपास के इलाकों में पानी फैले होने के कारण मवेशियों के लिए हरे चारे की उपलब्धता मुश्किल हो गई है. ग्रामीणों का कहना है कि पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना अब बड़ी चुनौती बन गया है.
जलस्तर में उतार-चढ़ाव से कटाव का खतरा
अधिकारियों के अनुसार गंडक नदी के जलस्तर में गिरावट राहत देने वाली है, लेकिन लगातार उतार-चढ़ाव के कारण नदी के किनारे कटाव का खतरा बना हुआ है. प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रख रहा है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां जारी हैं.
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