नेपाल त्रासदी के बीच वापस बेतिया लौटे मजदूर की फोटो

नेपाल बाढ़ त्रासदी की आंखों-देखी: मौत के मुंह से लौटा बेटा, पिता समेत 3 अब भी लापता, बोला- काम पर गए और उधर ही...

रसुआ की भीषण बाढ़ से चार मजदूरों की सुरक्षित वापसी ने परिजनों को राहत दी, लेकिन तीन मजदूरों के लापता होने से चनपटिया के परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है. सुरक्षित लौटे सलमान ने बताया कि अचानक आए सैलाब ने पलभर में सब कुछ बदल दिया.

नेपाल बाढ़ त्रासदी: नेपाल के रसुआ जिले में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ में फंसे पश्चिम चंपारण के चार मजदूर आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं. शुक्रवार देर शाम चारों के घर पहुंचते ही परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े. हालांकि, इस खुशी के बीच चनपटिया के पूर्वी तुरहापट्टी पंचायत के तीन परिवारों की चिंता अब भी खत्म नहीं हुई है. बाढ़ के बाद से उनके तीन परिजन लापता हैं और अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल सका है.

17 वर्षीय सलमान आलम ने बाढ़ का खौफनाक मंजर बताते हुए कहा कि बुधवार सुबह करीब 9.30 बजे अचानक तेज पानी का सैलाब आया. देखते ही देखते चारों ओर पानी फैल गया और कुछ भी दिखाई देना मुश्किल हो गया. सलमान जान बचाने के लिए ऊंचाई की ओर भागा और रास्ते में मिले एक व्यक्ति के साथ ऊपर चढ़ गया. इसी वजह से उसकी जान बच सकी.

एक कमरे में रहते थे सात मजदूर

सलमान ने बताया कि सभी मजदूर नेपाल के रसुआ जिले में बढ़ई, कारपेंटर और टाइल्स लगाने का काम करते थे. वे एक ही कमरे में सात लोग रहते थे. घटना की सुबह चार मजदूर काम पर गए थे, जबकि तीन मजदूर कमरे पर मौजूद थे. बाढ़ आने के बाद अफरातफरी मच गई.

पानी कम होने पर लोगों ने एक-दूसरे की तलाश शुरू की. सलमान समेत चार मजदूर सुरक्षित मिल गए, लेकिन काम पर गए तीन मजदूरों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है. लापता मजदूरों में सलमान के पिता अरमान आलम भी शामिल हैं.

हेलिकॉप्टर से आर्मी कैंप पहुंचाए गए मजदूर

बाढ़ में फंसे मजदूरों को बुधवार दोपहर करीब दो बजे नेपाल पुलिस ने हेलिकॉप्टर से धुन्चे स्थित आर्मी कैंप पहुंचाया. वहां करीब दो घंटे तक रखने के बाद उन्हें हेलिकॉप्टर से त्रिशूली के उनवा कोट स्थित आर्मी कैंप भेजा गया. मजदूरों के अनुसार, नेपाली प्रशासन ने नाश्ता, बिस्कुट, चाउमीन, पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं.

इसके बाद चारों मजदूर काठमांडू पहुंचे और गुरुवार को एक रिश्तेदार के यहां ठहरे. शुक्रवार सुबह काठमांडू से निकलकर वीरगंज पहुंचे. वहां से रक्सौल होते हुए ट्रेन से बेतिया आए और देर शाम अपने घर पहुंच गए.

तीन परिवारों में अब भी चिंता और इंतजार

लापता अरमान मियां | Prabhat Khabar Network

पूर्वी तुरहापट्टी वार्ड-1 निवासी समीर अंसारी (23), मोख्तार मियां (45) और अरमान आलम (35) अब भी लापता हैं. तीनों रसुआ जिले के धुन्चे क्षेत्र के श्याफ्रुबेसी गांव में बढ़ई का काम करते थे. घटना के समय वे स्थानीय गणेश होटल में फर्नीचर और टाइल्स लगाने का काम कर रहे थे.

लापता समीर अंसारी उम्र 23 | Prabhat Khabar Network

अरमान आलम की पत्नी शहरून खातून ने बताया कि पति और बेटा सलमान करीब एक महीने पहले ही नेपाल गए थे. बेटे के सुरक्षित लौटने से राहत जरूर मिली है, लेकिन पति के लापता होने से परिवार सदमे में है. परिजन अब भी उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

जान बची, लेकिन एक महीने की मजदूरी भी फंसी

नेपाल से लौटे मजदूरों के सामने अब बकाया मजदूरी की चिंता भी खड़ी हो गई है. मजदूरों के अनुसार, करीब एक महीने की मेहनत की कमाई अभी तक नहीं मिली है. जान बचाकर घर लौटने की खुशी के बावजूद उन्हें अपनी बकाया मजदूरी की चिंता सता रही है. वहीं, तीनों लापता मजदूरों के परिवार उनके सकुशल लौटने की उम्मीद में हर पल इंतजार कर रहे हैं.

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By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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