बिहार के किसान के बेटे का दुनिया में बजा डंका! आईआईटी दिल्ली से पीएचडी कर छह देशों में किया शोध, अब बने सीनियर रिसर्च इंजीनियर

बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर डॉ. नितीश कुमार ने सेमीकंडक्टर शोध के क्षेत्र में दुनिया भर में नाम कमाया है. IIT दिल्ली से पीएचडी पूरी करने के बाद उन्होंने कई देशों में शोध किया और अब वे एक बड़ी टेक कंपनी में सीनियर रिसर्च इंजीनियर हैं.

Bettiah Success Story: लौरिया. प्रखंड के डुमरा गांव के किसान परिवार से निकलकर डॉ. नितीश कुमार ने सेमीकंडक्टर शोध के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. आईआईटी दिल्ली से पीएचडी पूरी करने के बाद उन्होंने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया में शोध का अनुभव हासिल किया. अब वह हैदराबाद स्थित Micron Technology में सीनियर रिसर्च इंजीनियर के रूप में सेमीकंडक्टर शोध एवं विकास के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. उनके नाम 45 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हैं.

Lauriya News: किसान परिवार से निकलकर शोध के क्षेत्र में बनाई पहचान

डॉ. नितीश कुमार का जन्म लौरिया प्रखंड के डुमरा गांव के किसान परिवार में हुआ. उनके पिता बृजेश प्रसाद कृषि कार्य से जुड़े रहे हैं और वर्तमान में व्यवसाय भी करते हैं. उनके बड़े भाई सतीश प्रसाद लौरिया में व्यवसाय संचालित करते हैं.

ग्रामीण परिवेश और सीमित शैक्षणिक संसाधनों के बीच नितीश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की. बचपन से ही विज्ञान के प्रति उनकी विशेष रुचि रही, जिसने आगे चलकर उन्हें शोध के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया.

परास्नातक के दौरान ही शुरू कर दिया था शोध कार्य

स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की. परास्नातक के दौरान ही उन्होंने शोध कार्य शुरू कर दिया था.

इस दौरान उनके 15 अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित हुए. उनके पहले शोध पत्र को ‘बेस्ट शोध पत्र’ का सम्मान भी मिला. इस उपलब्धि ने शोध के क्षेत्र में उनकी आगे की यात्रा को मजबूत आधार दिया.

IIT दिल्ली से की PhD, 45 से अधिक शोध पत्रों के लेखक

वर्ष 2021 में उनका चयन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली में पीएचडी शोधार्थी के रूप में हुआ. कोविड महामारी के दौर में शुरू हुई पीएचडी के दौरान भी उन्होंने अपना शोध कार्य जारी रखा.

पीएचडी के पहले ही वर्ष में उनके तीन अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस शोध पत्र प्रकाशित हुए. पीएचडी पूरी होने तक वह 45 से अधिक शोध पत्रों के लेखक अथवा सह-लेखक बन चुके थे.

सेमीकंडक्टर के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया शोध

डॉ. नितीश का शोध सेमीकंडक्टर डिवाइस फैब्रिकेशन, डिवाइस रिलायबिलिटी टेस्टिंग, मॉडलिंग और टीकैड सिमुलेशन जैसे तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित रहा है.

उन्होंने नैनोस्केल सेमीकंडक्टर उपकरणों की थर्मल और मैकेनिकल विश्वसनीयता पर भी शोध किया है. सेमीकंडक्टर निर्माण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के विकास में इन क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है.

ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम में भी किया शोध

वर्ष 2023 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया-इंडिया रिसर्च स्टूडेंट (AIRS) फेलोशिप प्रदान की गयी. इसके तहत उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की मैक्वेरी यूनिवर्सिटी, सिडनी में विजिटिंग रिसर्चर के रूप में काम किया.

इसके बाद बेल्जियम के प्रतिष्ठित imec और KU Leuven में भी उन्होंने विजिटिंग रिसर्चर के रूप में शोध किया. शोध कार्य के सिलसिले में वह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया की यात्रा कर चुके हैं.

अकादमिक के साथ उद्योग का भी अनुभव

शोध को प्रयोगशाला से उद्योग तक ले जाने के उद्देश्य से उन्होंने मुंबई स्थित सेमीकंडक्टर स्टार्टअप साइक्लैरिटी में विजिटिंग रिसर्च साइंटिस्ट के रूप में भी काम किया.

इस दौरान उन्हें उद्योग की जरूरतों और व्यावहारिक शोध के बीच तालमेल का अनुभव मिला. पीएचडी पूरी करने के बाद जनवरी 2025 में उन्होंने फ्रांस की Grenoble INP–Université Grenoble Alpes में पोस्टडॉक्टरल रिसर्चर के रूप में कार्य किया.

अब Micron Technology में सेमीकंडक्टर शोध को दे रहे योगदान

वर्तमान में डॉ. नितीश कुमार हैदराबाद स्थित Micron Technology में सीनियर रिसर्च इंजीनियर हैं. यहां वह सेमीकंडक्टर शोध एवं विकास से जुड़े कार्यों में योगदान दे रहे हैं.

इसके साथ ही वह कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध जर्नल के समीक्षक हैं तथा IEEE Electron Devices Society के युवा सीनियर सदस्य भी हैं.

अकादमिक क्षेत्र में योगदान करना अगला लक्ष्य

डॉ. नितीश का अगला लक्ष्य देश की प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के अकादमिक क्षेत्र से जुड़ना है. वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में सहायक प्रोफेसर के रूप में सेवाएं देकर शोध और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में योगदान करना चाहते हैं.

गांव के युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

डुमरा जैसे ग्रामीण गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों तक पहुंचने वाले डॉ. नितीश कुमार की उपलब्धियां क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और निरंतर मेहनत को अपनी ताकत बनाया.

नगर पंचायत लौरिया के वार्ड पार्षद सैयद तनवीर हैदर ने अपने मित्र डॉ. नितीश कुमार को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की. उन्होंने कहा कि नितीश युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं.

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लेखक के बारे में

By कौशिक उर्फ राजा मिश्रा

कौशिक कुमार उर्फ राजा मिश्रा ने वर्ष 2011 में पश्चिम चंपारण जिले के लौरिया प्रखंड से प्रभात खबर के साथ पत्रकारिता की शुरुआत की. सामाजिक, राजनीतिक और विकास से जुड़े मुद्दों को निष्पक्षता से उठाना इनकी पहचान रही है. बंद पड़ी लौरिया चीनी मिल को चालू कराने तथा एचपीसीएल परियोजना जैसे जनहित के विषयों पर भी वें लगातार सक्रिय रहे हैं.

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