जलमग्न गाँव की सड़क
गाँव में घुसा बाढ़ का पानी, गलियाँ बनीं नदियाँ
नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का पानी सीधे बस्तियों में प्रवेश कर गया है. गाँव की मुख्य गलियों में कई फीट तक पानी भर जाने के कारण आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे ग्रामीण अपने सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने को मजबूर हैं
बाढ़ के पानी के बीच खड़ा बेबस मासूम बच्चा
मासूमों पर भी भारी पड़ी बाढ़ की मार
बाढ़ की त्रासदी का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा है. खेलकूद और पढ़ाई की उम्र में ये बच्चे अपने डूबते आशियाने और पानी से घिरे माहौल को देखने को मजबूर हैं.
कच्चे मकान के बाहर घुटने भर पानी में खड़े महिला और बच्चे।
घरों के आँगन तक पहुँचा पानी, बेबस दिखे ग्रामीण
बाढ़ के तेज बहाव के कारण पानी लोगों के झोपड़ियों और कच्चे मकानों के आँगन तक पहुँच चुका है. अपने ही घर के सामने खड़े ग्रामीण लाचारी और खौफ के साए में जीने को विवश हैं.
कच्चे मकान के दरवाजे से अंदर आते बाढ़ के गंदे पानी में चलती महिला
घर के भीतर जलजमाव, ठप हुआ चूल्हा-चौका
बाढ़ का पानी अब केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि घरों के भीतर रसोई और कमरों तक फैल चुका है.कच्चे मकानों के फर्श पर कई इंच पानी भर जाने से भोजन पकाने और दैनिक कार्यों के लिए गंभीर समस्या खड़ी हो गई है.
घर की जरूरी चीजें के साथ पानी के बीच से गुजरते ग्रामीण।
पलायन की बेबसी, सामान समेटकर निकलते लोग
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीण अपना कीमती सामान, बर्तन और मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं. प्रशासन की मदद से पहले उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुँचना ही प्राथमिकता है.
घर में पानी भरने के बाद लकड़ी के मचान (मचिया) पर बैठे बुजुर्ग ग्रामीण
मचान और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की मजबूरी
झोपड़ी के भीतर तक पानी भर जाने के कारण बुजुर्ग और असहाय लोग सूखे स्थानों की कमी से जूझ रहे हैं.जमीन पर सोने की जगह न होने के कारण वे लकड़ी और बांस के मचान बनाकर उस पर शरण लिए हुए हैं.