KCC Loan: किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण मामले में पुराने वारंट के आधार पर योगापट्टी थाना पुलिस ने शनिवार तड़के बलुआ नियाज राय गांव निवासी दो सगे भाइयों यशवंत गिरी और धनवंत गिरी को गिरफ्तार किया. हालांकि बाद में जिला समाहरणालय की नीलामी शाखा से वारंट स्थगन आदेश मिलने पर दोनों को रिहा कर दिया गया.
ऋण चुकाने का दावा, गिरफ्तारी पर जताई आपत्ति
दोनों भाइयों का कहना है कि उन्होंने उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक, मच्छरगांवा शाखा से लिया गया केसीसी ऋण जनवरी 2025 में ही चुका दिया था. उनका आरोप है कि बैंक और जिला नीलामी शाखा की त्रुटि के कारण पुराने वारंट के आधार पर गिरफ्तारी हुई. पुलिस को ऋण भुगतान से जुड़े दस्तावेज दिखाने के बाद सत्यापन कराया गया और वारंट स्थगन आदेश मिलने पर उन्हें छोड़ दिया गया.
सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने का आरोप
धनवंत गिरी ने कहा कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला या धारा 107 की कार्रवाई नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि अनावश्यक गिरफ्तारी से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है और वे बैंक के खिलाफ मानहानि का दावा दायर करेंगे.
बैंक ने आरोपों का किया खंडन
वहीं उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक, मच्छरगांवा शाखा के प्रबंधक कुंदन कुमार उपाध्याय ने आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वारंट जारी होने के बाद ऋणधारकों ने समय मांगा था और बकाया राशि जमा कर खाता बंद करने का आश्वासन दिया था. बैंक ने उन्हें जिला नीलाम पत्र कार्यालय में कोर्ट फीस जमा कर वारंट रिकॉल कराने की सलाह भी दी थी, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. इसी कारण पहले से जारी वारंट के आधार पर कार्रवाई हुई.
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
फिलहाल बैंक और पीड़ित पक्ष के दावे अलग-अलग हैं. ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जिला नीलाम पत्र कार्यालय के अभिलेखों और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
