Bettiah News: बिहार के निजी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है. शहर के निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था (Fire Safety) की जमीनी हकीकत जांचने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सोमवार, 08 जून 2026 को एक विशेष फायर ऑडिट अभियान चलाया गया.
इस औचक निरीक्षण के दौरान शहर के दो प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में अग्निशमन सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन और आवश्यक जीवन रक्षक व्यवस्थाओं में भारी कमी पाई गई है. प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए दोनों अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है.
जिलाधिकारी के निर्देश पर बनी संयुक्त टीम ने की छापेमारी
अस्पतालों में सुरक्षा ऑडिट की यह कार्रवाई जिलाधिकारी के विशेष निर्देश पर की गई. निरीक्षण के लिए अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) विकास कुमार के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय संयुक्त टीम का गठन किया गया था. इस टीम में जिला अग्निशमन पदाधिकारी सह होमगार्ड समादेष्टा सहित नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे.
संयुक्त टीम ने सोमवार को शहर के करीब आधा दर्जन निजी अस्पतालों का सघन निरीक्षण किया. इस दौरान टीम ने अस्पताल परिसरों में इंस्टॉल किए गए फायर सेफ्टी उपकरणों की क्रियाशीलता, आपातकालीन निकास मार्गों (Emergency Exit Routes) की उपलब्धता, आग लगने की स्थिति में वेंटिलेशन और सुरक्षा मानकों की बिंदुवार विस्तृत जांच की.
एक नजर में: बेतिया निजी अस्पताल फायर ऑडिट रिपोर्ट
प्रशासनिक टीम द्वारा की गई जांच और की गई कार्रवाई का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| ऑडिट पैरामीटर / बिंदु | जांच की वर्तमान स्थिति एवं कार्रवाई |
|---|---|
| जांच की तारीख | सोमवार, 08 जून 2026 |
| जांच टीम के प्रमुख | विकास कुमार (अनुमंडल पदाधिकारी, बेतिया) |
| खामियां पाए जाने वाले अस्पताल | 1. आस्था हॉस्पिटल, बेतिया |
2. ग्रेट हॉस्पिटल, बेतिया |
| पाई गई मुख्य कमियां | अग्निशमन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन, फायर उपकरणों एवं आपातकालीन निकास में खामियां. |
| प्रशासनिक अल्टीमेटम | 01 सप्ताह (7 दिन) के भीतर स्पष्टीकरण और कमियां दूर करने का समय. |
| चेतावनी / दंडात्मक कार्रवाई | संतोषजनक जवाब न मिलने पर अस्पताल को सील करने और संचालन रोकने की चेतावनी. |
आस्था और ग्रेट हॉस्पिटल में मिलीं गंभीर खामियां, एक सप्ताह का अल्टीमेटम
निरीक्षण के दौरान शहर के ‘आस्था हॉस्पिटल’ और ‘ग्रेट हॉस्पिटल’ के बुनियादी सुरक्षा ढांचे में कई बड़ी खामियां और लापरवाही सामने आईं. जांच टीम ने पाया कि दोनों अस्पतालों के पास आग जैसी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त या सुचारू इंतजाम नहीं थे.
जांच टीम ने दोनों अस्पताल प्रबंधनों को मौके पर ही कड़ी फटकार लगाई और आधिकारिक नोटिस थमा दिया. अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि नोटिस मिलने के बाद एक सप्ताह के भीतर प्रबंधन की ओर से कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, या सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुधार नहीं किए गए, तो नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मरीजों की जान से समझौता नहीं: प्रशासन
प्रशासनिक रुख: जांच टीम का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. किसी भी कमर्शियल या स्वास्थ्य संस्थान को मासूम जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करने और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी.
अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि यह अभियान महज प्रतीकात्मक नहीं है. आने वाले दिनों में जिले के अन्य सभी निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम्स, क्लीनिकों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का भी चरणबद्ध तरीके से फायर ऑडिट किया जाएगा. इस कड़े प्रशासनिक एक्शन के बाद जहां बेतिया के निजी अस्पताल संचालकों और डॉक्टरों के बीच हड़कंप की स्थिति बनी हुई है, वहीं आम नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे जन सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी कदम बताया है.
बेतिया से अवध किशोर तिवारी की रिपोर्ट
