बेतिया से संजय कुमार पांडे की रिपोर्ट
Bettiah News: बेतिया जिले के सबसे बड़े प्रखंड मझौलिया में प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है. यहां प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) डॉ. राजीव रंजन कुमार को छोड़कर कोई भी प्रखंड स्तरीय अधिकारी मुख्यालय में निवास नहीं करता है. इसका सीधा असर विकास और विभागीय कार्यों की गति पर पड़ रहा है, जो पूरी तरह से धीमी पड़ गई है.
1. ट्रेनों के समय से चलता है सरकारी महकमा
भौगोलिक दृष्टिकोण से प्रखंड, अंचल, स्वास्थ्य, आईसीडीएस, मनरेगा, जीविका और आपूर्ति विभाग के कार्यालय रेलवे स्टेशन के बेहद करीब हैं. इसका फायदा उठाते हुए अधिकांश अधिकारी और निचले स्तर के कर्मी ट्रेन से ही आवाजाही करते हैं.
- आने-जाने का कोई समय नहीं: इन अधिकारियों का ड्यूटी पर आने और जाने का कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है.
- कहावत हुई चरितार्थ: मझौलिया के सरकारी दफ्तरों में “11 बजे लेट नहीं, चार बजे भेंट नहीं” का फार्मूला पूरी तरह से लागू होता है.
- अन्य शहरों से आते हैं अधिकारी: ज्यादातर अधिकारी बेतिया से आते-जाते हैं, जबकि कुछ अधिकारी सगौली, मोतिहारी, रक्सौल और चनपटिया से सफर करते हैं.
2. जनप्रतिनिधि भी कार्यालय से दूर
अधिकारियों की तो बात ही छोड़िए, प्रखंड के सिरमौर कहलाने वाले प्रमुख और उपप्रमुख भी नियमित रूप से कार्यालय नहीं आते हैं. वहीं, पंचायत स्तर पर काम करने वाले पंचायत सचिव और राजस्व कर्मचारी तो दफ्तरों में बिरले ही नजर आते हैं. सिर्फ दोपहिया वाहन वाले कुछ कर्मी ही समय से ऑफिस पहुंचते दिखते हैं.
3. लग्जरी गाड़ियों का जमावड़ा और ईंधन की बर्बादी
ईंधन की खपत कम करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फरमान का मझौलिया में कोई असर देखने को नहीं मिलता है.
- प्रखंड के पंचायत मुखिया भी चारपहिया लग्जरी वाहनों से ही मुख्यालय पहुंचते हैं.
- जब भी प्रखंड मुख्यालय में पंचायत समिति (बीडीसी) की बैठक होती है, तो पूरा प्रखंड परिसर लग्जरी गाड़ियों से भर जाता है.
