Bettiah: अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर बेतिया के डॉक्टरों ने सराहा नर्सों का निस्वार्थ सेवा भाव

Bettiah News: ​अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर विशेष रिपोर्ट. जानें क्यों नर्सें हैं स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ और क्या है वर्ष 2026 की थीम. फ्लोरेंस नाइटिंगेल के सिद्धांतों पर चलते हुए कैसे ये 'सिस्टर्स' बिना किसी बहाने के मानवता की सेवा में जुटी हैं. पढे़ं पूरी खबर…

बेतिया से आलोक अगस्टीन की रिपोर्ट

Bettiah News: आधुनिक नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल ने कहा था, “मैं अपनी सफलता का श्रेय इस बात को देती हूं कि मैंने कभी कोई बहाना नहीं बनाया.” उनके ये शब्द आज भी नर्सिंग जगत के लिए प्रेरणापुंज हैं. हर साल 12 मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी ‘नर्सों’ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है.

​”हमारी नर्सें, हमारा भविष्य”

​वर्ष 1974 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्सेज द्वारा शुरू किया गया यह दिन इस बार विशेष थीम “हमारी नर्सें, हमारा भविष्य : सशक्त नर्सें बचाती हैं जीवन” के साथ मनाया जा रहा है. यह थीम स्पष्ट करती है कि यदि नर्सों को सुरक्षित वातावरण, संसाधन और नेतृत्व मिले, तो वे स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल सकती हैं.

​चिकित्सकों ने सराहा नर्सों का जज्बा

​जिले के प्रख्यात विशेषज्ञों ने नर्सों की भूमिका को रेखांकित किया है. हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेश चटर्जी ने उन्हें स्वास्थ्य सेवा की ‘आत्मा’ बताया, वहीं आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विवेक कर्ण ने नर्सों को अस्पतालों की ‘रीढ़’ करार दिया. स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूबी ने कहा कि किसी अस्पताल की सफलता नर्सिंग ऑफिसर्स के टीम वर्क पर टिकी होती है. वरिष्ठ सर्जन डॉ. अमिताभ चौधरी और मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. राकेश रौशन ने भी माना कि नर्सों की व्यावसायिकता और दयालुता ही मरीजों को उम्मीद और नया जीवन प्रदान करती है. बिना प्रिस्क्रिप्शन के करुणा बांटने वाली ये नर्सें वास्तव में समाज की रक्षक हैं.

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लेखक के बारे में

By Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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