बेतिया से आलोक अगस्टीन की रिपोर्ट
Bettiah News: आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का प्रतीक माना जाने वाला बेतिया सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) उचित रखरखाव के अभाव में बदहाली के आंसू रो रहा है. करीब 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी इस इमारत की चमक महज छह साल में ही फीकी पड़ गई है. अस्पताल के सी-ब्लॉक में जगह-जगह उखड़ती टाइल्स, दरकती दीवारें और टूटते दरवाजे अब निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं.
निर्माण गुणवत्ता मानकों की अनदेखी
वर्ष 2020 में शुरू हुए सी-ब्लॉक की स्थिति इतनी जर्जर हो गई है कि ग्राउंड फ्लोर से लेकर पांचवें फ्लोर तक टाइल्स उखड़ कर गिर रहे हैं. नर्सिंग काउंटर, रैंप और दरवाजों के पास की दीवारें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. इससे मरीजों, परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों में हमेशा किसी अप्रिय घटना का डर बना रहता है. जानकारों का कहना है कि किसी भी सरकारी इमारत के लिए छह साल में ऐसी टूट-फूट सामान्य नहीं है, जो घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की ओर इशारा करती है.
फेल ड्रेनेज सिस्टम और संक्रमण का खतरा
जीएमसीएच की सबसे बड़ी समस्या यहां का ड्रेनेज सिस्टम है, जो पूरी तरह फेल हो चुका है. अस्पताल परिसर में शौचालय और नालों का गंदा पानी बह रहा है. सी-ब्लॉक के कई हिस्सों में जलजमाव और उससे उठने वाली बदबू ने मरीजों का जीना मुहाल कर दिया है. गंदगी के कारण अस्पताल में संक्रमण फैलने का खतरा भी काफी बढ़ गया है, जिससे इलाज कराने आए लोग अतिरिक्त बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं.
क्या कहता है अस्पताल प्रशासन?
इस बदहाली पर जीएमसीएच के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि सी-ब्लॉक में उखड़े टाइल्स और ड्रेनेज की समस्या को लेकर निर्माण एजेंसी BMSICL को सूचित कर दिया गया है. उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मरम्मत कार्य कराकर व्यवस्था को दुरुस्त कर लिया जाएगा. हालांकि, स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर काफी आक्रोश है.
