Bettiah News: पश्चिम चंपारण के बेतिया स्थित अवर न्यायाधीश-चतुर्थ की अदालत ने श्रमिक असगर अली से जुड़े निष्पादन वाद में बिहार राज्य चीनी निगम लिमिटेड के प्रति कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने निगम को पूर्व के न्यायालयी आदेश का अनुपालन करने का अंतिम अवसर दिया है. आदेश का पालन नहीं होने पर बैंक खातों और संबंधित अधिकारियों के वेतन की कुर्की के साथ गिरफ्तारी जैसी वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
श्रम न्यायालय के आदेश का पालन जरूरी
अदालत में निष्पादन वाद संख्या 03/2022 की सुनवाई के दौरान बताया गया कि श्रम न्यायालय, मोतिहारी ने वर्ष 2007 में श्रमिक असगर अली की सेवा बहाल करने का आदेश दिया था. इसके साथ 60 प्रतिशत बकाया वेतन, वाद व्यय और अन्य देय राशि का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया था.
इस आदेश को चुनौती देने वाली सिविल रिवीजन याचिका पटना उच्च न्यायालय द्वारा पहले ही खारिज की जा चुकी है. ऐसे में अदालत ने कहा कि श्रम न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया जाना आवश्यक है.
एग्जिट पॉलिसी की दलील अदालत ने नहीं मानी
सुनवाई के दौरान बिहार राज्य चीनी निगम की ओर से निकास नीति यानी एग्जिट पॉलिसी का हवाला देते हुए पूर्ण दायित्व से इनकार किया गया. हालांकि अदालत ने प्रथम दृष्टया इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी की ओर से दी गई व्याख्या न्यायालय को स्वीकार्य नहीं है. निगम को श्रम न्यायालय के आदेश का पालन करना होगा.
बैंक खातों और वेतन की कुर्की की चेतावनी
अदालत ने निगम को आदेश की प्रति भेजकर अनुपालन का अंतिम अवसर देने का निर्देश दिया है. साथ ही बिहार सरकार के प्रधान सचिव और पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी को पूर्व में भेजे गए पत्र का स्मरण कराया गया है.
अदालत ने बिहार राज्य चीनी निगम की चल एवं अचल संपत्तियों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर कुर्की की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
गिरफ्तारी तक की हो सकती है कार्रवाई
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर विधि के अनुरूप कठोर कार्रवाई की जाएगी. इसमें निगम के बैंक खातों की कुर्की, संबंधित अधिकारियों के वेतन की कुर्की और आवश्यक होने पर गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है.
28 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है. अब निगाह इस बात पर है कि अगली सुनवाई से पहले बिहार राज्य चीनी निगम की ओर से न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया जाता है या नहीं.
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