Anganwadi Workers: भितहा प्रखंड की आंगनवाड़ी सेविकाएं और सहायिकाएं पिछले कई महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं होने के कारण आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं. अधिकांश सेविकाओं का करीब पांच माह का मानदेय लंबित है, जबकि कुछ को केवल एक या दो माह का ही भुगतान मिल सका है. इससे उनके परिवार का भरण-पोषण और दैनिक जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है.
परिवार चलाना हुआ मुश्किल
मानदेय समय पर नहीं मिलने से सेविकाओं को बच्चों की पढ़ाई, इलाज, राशन और अन्य जरूरी खर्चों में परेशानी हो रही है. कई परिवारों को घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज तक लेना पड़ रहा है.
कई महत्वपूर्ण योजनाओं की जिम्मेदारी निभा रही हैं सेविकाएं
आंगनवाड़ी सेविकाओं का कहना है कि वे सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का जमीनी स्तर पर संचालन कर रही हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
| जिम्मेदारी | कार्य |
| पोषण अभियान | बच्चों और महिलाओं के पोषण की निगरानी |
| टीकाकरण | स्वास्थ्य विभाग के साथ सहयोग |
| गर्भवती एवं धात्री महिलाओं की देखभाल | नियमित निगरानी एवं परामर्श |
| प्री-स्कूल शिक्षा | छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा |
| पोषण सेवाएं | बच्चों के स्वास्थ्य एवं विकास की देखरेख |
सेविकाओं का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलना चिंता का विषय है.
संघ ने सरकार से की भुगतान की मांग
आंगनवाड़ी सेविका संघ की सचिव अनिता कुशवाहा ने बताया कि किसी सेविका को एक माह तो किसी को दो माह का मानदेय मिला है, लेकिन अधिकांश सेविकाओं का पांच माह से अधिक का मानदेय अभी भी बकाया है.
उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से लंबित मानदेय का जल्द भुगतान कराने की मांग की. उनका कहना है कि समय पर मानदेय मिलने से सेविकाएं और सहायिकाएं आर्थिक चिंता से मुक्त होकर अपने दायित्वों का अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकेंगी.
