प्रेसवार्ता करते विधायक अभिषेक रंजन

सहरसा में पत्रकार से मारपीट पर भड़के विधायक, बोले- सिर्फ FIR नहीं, दोषियों पर कार्रवाई भी दिखनी चाहिए

कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने सहरसा में पत्रकार के साथ मारपीट की घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करार दिया है. उन्होंने सरकार से तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि सवाल पूछने वालों को डराना लोकतंत्र को कमजोर करता है.

Saharsa Journalist Assault Case: सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ कथित मारपीट और गाली-गलौज की घटना को लेकर चनपटिया के कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने घटना की तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की. विधायक ने कहा कि पत्रकार का काम सवाल पूछना है और किसी सवाल से असहमति होने पर उसका जवाब दिया जाना चाहिए, पत्रकार की पिटाई नहीं. उन्होंने सहरसा की घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाया.

पत्रकार से मारपीट को बताया लोकतंत्र पर हमला

अभिषेक रंजन ने कहा कि पत्रकार सत्ता, प्रशासन और व्यवस्था से सवाल करता है. इसलिए उसे किसी का दुश्मन नहीं माना जा सकता. अगर किसी सवाल से असहमति है तो उसका जवाब दिया जाना चाहिए, लेकिन पत्रकार को डराने, धमकाने या उसके साथ हिंसा करने का अधिकार किसी को नहीं है. उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की आंख और कान हैं और उनकी आवाज दबाने की कोशिश लोकतंत्र को कमजोर करती है.

प्राथमिकी के साथ त्वरित कार्रवाई की मांग

विधायक ने कहा कि बिहार में पत्रकारों के साथ बदसलूकी, धमकी और मारपीट की शिकायतें सामने आती रही हैं. उन्होंने बेतिया के जीएमसीएच में पत्रकारों के साथ बदसलूकी, मोबाइल छीनने और मारपीट की शिकायतों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कई मामलों में दबाव के बाद प्राथमिकी दर्ज होती है, लेकिन कार्रवाई की गति और परिणाम को लेकर पत्रकारों में असंतोष रहता है. केवल प्राथमिकी दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, दोषियों पर निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई भी होनी चाहिए.

पत्रकारों पर हमला हुआ तो सड़क से सदन तक उठेगी आवाज

अभिषेक रंजन ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि चनपटिया, पश्चिम चंपारण या बिहार के किसी भी हिस्से में पत्रकारों पर हमला हुआ तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आवाज उठाएगी. उन्होंने आगामी विधानसभा सत्र में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार का मुद्दा मजबूती से उठाने की बात कही.

सवाल पूछने वालों को डराना लोकतंत्र को करता है कमजोर

विधायक ने कहा कि लोकतंत्र में सवालों से भागने का रास्ता नहीं हो सकता. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार मुश्किल सवालों से बचने या पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है. उन्होंने कहा कि पत्रकार आज सवाल पूछ रहे हैं और कल जनता जवाब पूछेगी. उनके अनुसार लोकतंत्र में सवालों का जवाब देना जरूरी है, सवालों से भागना नहीं.

बाढ़ के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा

अभिषेक रंजन ने बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने भाजपा के ‘सेवा पखवाड़ा’ और ‘आशीर्वाद का दिया’ अभियान पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को पहले बाढ़ प्रभावित जनता की चिंता करनी चाहिए. उन्होंने पश्चिम चंपारण के योगापट्टी, बैरिया और नौतन समेत कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने का दावा किया. विधायक ने विस्थापित परिवारों और किसानों की फसल बर्बाद होने का मुद्दा भी उठाया.

बोले- पहले घरों में चूल्हा जलाइए, फिर दिया जलाइए

अभिषेक रंजन ने कहा कि सरकार को बाढ़ से निपटने के लिए तटबंधों की मजबूती, नदियों के वैज्ञानिक प्रबंधन, जलनिकासी और बाढ़ प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर ठोस काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि जनता अब वादे नहीं, परिणाम चाहती है. विधायक ने सड़क, फसल क्षति मुआवजा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं के लाभ से जुड़ी समस्याओं का भी मुद्दा उठाया.

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लेखक के बारे में

By गणेश वर्मा

गणेश ने अपनी पत्रकारिता यात्रा की शुरुआत 2014 में गोरखपुर स्थित हिंदुस्तान अखबार से की। तब से लगातार मुख्यधारा मीडिया में सक्रिय रहकर उन्होंने रिपोर्टिंग से लेकर संपादकीय दायित्वों तक का अनुभव हासिल किया है। फिलहाल वे प्रभात खबर से जुड़े हैं और पश्चिम चम्पारण जिले में बतौर ब्यूरो चीफ कार्यरत हैं।

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