Bagaha News: करीब 33 वर्ष पुराने चर्चित अपहरण मामले की सुनवाई अब भी गवाही के अभाव में लंबित है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत में विचाराधीन इस मामले में लगातार गवाहों के उपस्थित नहीं होने पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है, ताकि लंबे समय से लंबित मामले का निष्पादन हो सके.
1993 में दस्युओं ने किया था अपहरण
अभियोजन के अनुसार घटना 23 फरवरी 1993 की है. चम्पापुर निवासी विश्वमोहन सिंह ट्रैक्टर से रामनगर जा रहे थे. इसी दौरान औरहिया के पास दस्युओं ने ट्रैक्टर को रोक लिया और उन्हें जबरन उतारकर अपहरण कर लिया. उस समय क्षेत्र में दस्यु गिरोहों का आतंक था और घटना ने काफी चर्चा बटोरी थी.
राधा और रघुनाथ समेत कई आरोपी बनाए गए थे
मामले में कुख्यात दस्यु सरगना राधा, उसके भाई रघुनाथ समेत कई लोगों को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था. पुलिस ने अनुसंधान पूरा करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया, जिसके बाद मामले को विचारण के लिए भेजा गया.
तीन दशक बाद भी गवाही की प्रक्रिया अधूरी
तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गवाहों की अनुपस्थिति के कारण मामले की सुनवाई अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी. बार-बार तिथि निर्धारित होने के बाद भी गवाहों के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने से साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
मामले में कुल आठ गवाह
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले में कुल आठ गवाह हैं. इनमें तत्कालीन दो सहायक अवर निरीक्षक (सअनि), एक चौकीदार तथा अन्य प्रत्यक्ष एवं औपचारिक गवाह शामिल हैं. इन गवाहों की गवाही दर्ज होना मामले की सुनवाई में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का निर्देश
गवाहों के लगातार अनुपस्थित रहने को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. न्यायालय का प्रयास है कि गवाही की प्रक्रिया पूरी कर लंबे समय से लंबित इस मामले का जल्द निष्पादन किया जा सके.
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