Begusarai News : बखरी में रामचरितमानस के रचयिता संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास की जयंती सप्ताह के अवसर पर बौद्धिक परिचर्चा का आयोजन किया गया. बखरी स्थित श्री विश्वबंधु पुस्तकालय में आयोजित मानस चर्चा में जेन जी और नई पीढ़ी के संदर्भ में रामचरितमानस की प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.
रामचरितमानस सर्वकालिक और सार्वदेशिक महाकाव्य : डॉ. रवीन्द्र राकेश
परिचर्चा को संबोधित करते हुए हिंदी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. रवीन्द्र राकेश ने कहा कि रामचरितमानस देश और काल की सीमाओं से परे सर्वकालिक और सार्वदेशिक महाकाव्य है. उन्होंने कहा कि रामचरितमानस सामाजिक समरसता और समन्वय का सागर है, जिससे समाज को आज भी प्रेरणा मिलती है.
जेन जी और जेन अल्फा को रामचरितमानस से लेनी चाहिए शिक्षा
परिचर्चा में विशेष अतिथि के रूप में शामिल पूर्व पार्षद और संरक्षक समिति के सदस्य सिधेश आर्य ने कहा कि आज की नई पीढ़ी, जेन जी और जेन अल्फा को रामचरितमानस से शिक्षा लेनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महर्षि विश्वामित्र के साथ आततायी राक्षसों का समूल नाश करने के लिए दंडकारण्य गए किशोर राम और लक्ष्मण भी उस समय युवा अवस्था में थे. उन्होंने बाली पुत्र अंगद का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी युवा थे, जिन्होंने लंका की राजसभा में ऐसा पांव जमाया कि महाबली रावण भी उसे हिला नहीं पाया. उन्होंने कहा कि यही युवा शक्ति का उदाहरण है. आज की नई पीढ़ी में उग्रता के साथ-साथ धीर, वीर और गंभीर गुणों का भी समावेश होना चाहिए.
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राष्ट्र निर्माण में लगनी चाहिए युवाओं की शक्ति
पुस्तकालय सचिव अमित पोद्दार ने कहा कि भारत के युवा अनुशासित हैं और उनकी शक्ति राष्ट्र निर्माण में लगती है. उन्होंने युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता पर जोर दिया.
विचार-विमर्श से दूर होंगी सामाजिक कुरीतियां
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संरक्षक समिति के संयोजक प्रो. आनंद चंद्र झा ने इस प्रकार के विचार-विमर्श लगातार आयोजित किए जाने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और युवाओं को नैतिकता की राह पर आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं.
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छात्र-छात्राओं ने भी रखे अपने विचार
परिचर्चा को संरक्षक समिति के पूर्व सदस्य नंदलाल पंडित, पूर्व अध्यक्ष कौशल किशोर क्रांति, रुक्मिणी कुमारी, राजकुमारी और रामनंदन अज्ञानी ने भी संबोधित किया. वहीं तुलसीकृत रामचरितमानस पर आस्था कुमारी साहू, आस्था बजाज, वैष्णवी केसरी, वैष्णवी कुमारी, राधिका, शुभ्र राजा, वैद्यनाथ कुमार, मधुसूदन और दीनदयाल ने भी अपने विचार रखे. राजन कुमार के संचालन में आयोजित परिचर्चा में संरक्षक समिति के सदस्य वैद्यनाथ प्रसाद केसरी, विजय कुमार नेमानी, डॉ. कैलाश पोद्दार, पूर्व अध्यक्ष जयदेव सान्याल, नीरज राय, राहुल केसरी, कुंदन केसरी सहित अन्य लोग मौजूद थे.
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